Happy Passia : अमेरिका में गिरफ्तार गैंगेस्टर हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी पासिया के बारे में फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि ऐसा संदेह है कि पासिया पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और खालिस्तानी आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के साथ मिलकर काम कर रहा था। पासिया को हाल ही में सैक्रेमेंटो में FBI एवं ERO ने गिरफ्तार किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पासिया को प्रत्यर्पित कर भारत लाने की दिशा में पहल कर चुकी है। पासिया अवैध तरीके से अमेरिका में दाखिल हुआ था।
बचने के लिए बर्नर फोन का इस्तेमाल करता था पासिया
जांच एजेंसी का कहना है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए पासिया बर्नर फोन और कूट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता आ रहा था। इससे उसके ठिकानों का पता लगाना मुश्किल हो रहा था। नई दिल्ली में एफबीआई ऑफिस के एजेंटों ने अमेरिकी अधिकारियों को बताया था कि पंजाब में हुए कई आतंकी हमलों में पासिया वांछित है। इस बीच, पंजाब के पुलिस महानिदेशक ने पासिया की गिरफ्तारी को एक बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि आतंकी की गिरफ्तारी से आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसने में काफी मदद मिलेगी।
इंटरपोल ने ‘ब्लू नोटिस’ जारी किया था
चंडीगढ़ ग्रेनेड हमला मामले की जांच के सिलसिले में एनआईए के अनुरोध पर इंटरपोल ने ‘ब्लू नोटिस’ जारी किया था। एनआईए ने फरार आरोपी पर पांच लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था। पिछले महीने, एनआईए ने हमले में संलिप्त रहने को लेकर उसके अलावा पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादी हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा समेत तीन अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। सूत्रों ने बताया कि पासिया के खिलाफ एनआईए के अनुरोध पर ‘ब्लू नोटिस’ जारी किया गया था। इंटरपोल का ‘ब्लू नोटिस’ किसी आपराधिक जांच के संबंध में व्यक्ति की पहचान, ठिकाने या गतिविधियों के बारे में अतिरिक्त जानकारी एकत्र करने के लिए जारी किया जाता है।
अप्रैल 2018 में दुबई चला गया था पासिया
अमृतसर जिले का रहने वाला पासिया अप्रैल 2018 में दुबई चला गया था और फरवरी 2019 में भारत लौटा था। वह अक्टूबर 2020 में लंदन गया और उसके बाद अमेरिका चला गया। सितंबर और अक्टूबर 2023 के बीच, पासिया ने रिंदा के साथ मिलकर पंजाब में जबरन वसूली और आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने डर पैदा करने के लिए शराब ठेकेदारों और व्यापारियों को निशाना बनाया तथा जबरन वसूली के लिए धमकी भरे फोन किए। वहीं, बटाला और अमृतसर में शराब के ठेकों पर आगजनी और गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम दिया।
