Farmer Protest News: किसान एक बार फिर दिल्ली आज रहे हैं। आज दोपहर करीब 1 बजे बड़ी संख्या में किसान शंभू बॉर्डर से दिल्ली के लिए पैदल कूच करेंगे। किसानों के पैदल मार्च को लेकर पुलिस ने भी सुरक्षा बढ़ा दी है और दिल्ली में किसानों को दाखिल होने से रोकने के लिए बैरीकेट्स लगाए गए हैं। बता दें, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में 101 किसानों का एक जत्था शंभू बॉडर से दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू करेगा।
उधर, किसानों के मार्च को देखते हुए अंबाला जिला प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत अगले आदेश तक पैदल, वाहन या अन्य साधनों से कोई भी जुलूस निकालने पर रोक लगा दी गयी है। किसानों की दिल्ली मार्च को लेकर अंबाला में पुलिस ने भी अलर्ट जारी किया है। हरियाणा सीमा पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग किए जाने के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को मार्च की अनुमति नहीं है, ऐसे में उन्हें रोकने के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
क्या हैं किसानों की मांगे
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी।
- किसान कृषि ऋण माफी।
- किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन।
- बिजली दरों बढ़ोतरी न की जाए।
- किसानों पर दर्ज पुलिस मामलों की वापसी।
- 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय।
- भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली।
- किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा।
दाता सिंह वाला बॉर्डर पर भी सुरक्षा बल अलर्ट
किसानों के दिल्ली कूच के मद्देनजर हरियाणा के दाता सिंह वाला बार्डर पर भी सुरक्षाबलों को अलर्ट किया गया है। किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए नरवाना-पटियाला राष्ट्रीय राजमार्ग पर उझाना नहर पर बैरीकेट्स लगाए गये हैं। नरवाना मे नहर पूल पर नाकाबंदी की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, हालात को देखते हुए दातासिंह वाला बॉर्डर पर सुरक्षा बल की 14 कंपनियां तैनात की गई हैं और हर आने-जाने वाले व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा इस इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।
8 महीने से डेरा डाले हुए हैं किसान
बता दें, अपनी मांगों के समर्थन में किसान करीब 8 महीने से डेरा डाले हुए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा दिल्ली की ओर मार्च रोके जाने के बाद वे 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि अगर अब भी सरकार उन्हें मार्च निकालने से रोकती है तो यह उनके लिए नैतिक जीत होगी।
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