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कब तक जारी रहेगा किसानों का धरना? किसान नेता ने दिया जवाब; सरकार के सामने रखी ये मांग

Kisan Andolan: किसानों का विरेध प्रदर्शन और धरना कब तक चलता रहेगा? इस सवाल का जवाब खुद किसान नेता ने दिया है। अभिमन्यु कोहाड़ का कहना है कि केंद्र पर निर्भर करता है कि हमारा धरना कब तक जारी रहेगा। कोहाड़ ने कहा कि किसान नेता केवल डल्लेवाल की भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं कि केंद्र को किसानों से किए गए वादे पूरे करने चाहिए।

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किसानों का प्रदर्शन

Photo : PTI

Farmers Protest: किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह केंद्र के हाथ में है कि उनका विरोध कब तक जारी रहेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी मांगों को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि एक संसदीय समिति ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी देने की सिफारिश की है।

डल्लेवाल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का 38वां दिन

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 38वें दिन कोहाड़ ने कहा कि उनका स्वास्थ्य हर रोज बिगड़ता जा रहा है और उन्होंने किसानों के हित के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया है। यह पूछे जाने पर कि खनौरी और शंभू बॉर्डर पर उनका विरोध कब तक जारी रहेगा, कोहाड़ ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह केंद्र के हाथ में है। अगर वे हमारी मांगें पूरी करते हैं...।’’ उच्चतम न्यायालय द्वारा बृहस्पतिवार को यह कहे जाने पर कि कुछ किसान नेता जमीनी स्तर पर स्थिति को और अधिक जटिल बनाने के लिए मीडिया में गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं, कोहाड़ ने कहा कि उन्होंने अभी अदालत की टिप्पणियों का अवलोकन नहीं किया है। उन्होंने खनौरी में कहा, ‘‘आज की कार्यवाही का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है...।’’

हालांकि, कोहाड़ ने कहा कि किसान नेता केवल डल्लेवाल की भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं कि केंद्र को किसानों से किए गए वादे पूरे करने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम हमेशा संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं।’’ हाल की एक घटना का जिक्र करते हुए कोहाड़ ने कहा कि डल्लेवाल ने अपने गंभीर स्वास्थ्य और कुछ मिनटों के लिए बेहोश होने के बावजूद किसानों के मामले की सुनवाई कर रही शीर्ष अदालत की कार्यवाही में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़ने की पेशकश की।

उच्चतम न्यायालय से केंद्र को निर्देश देने की कर दी मांग

किसान नेता ने कहा, ‘‘हमने केवल इतना कहा है कि उच्चतम न्यायालय को केंद्र को निर्देश देना चाहिए कि जब एक संसदीय समिति ने भी एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की सिफारिश की है, तो केंद्र सरकार को इसे लागू करना चाहिए।’’ कोहाड़ ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि किसानों से किए गए वादे पूरे हों।’’ संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं।

कोहाड़ ने कहा, ‘‘डल्लेवाल जी के अनशन का 38वां दिन है। एक वरिष्ठ नेता ने अपना जीवन दांव पर लगा दिया है। 4 जनवरी को किसानों के ‘दर्शन’ की उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए खनौरी में किसानों की एक बड़ी सभा बुलाई गई है जिसमें वह एक महत्वपूर्ण संदेश देंगे।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या डल्लेवाल चिकित्सा सहायता लेंगे, कोहाड़ ने कहा कि ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है कि उन्हें ‘ड्रिप’ लगाई जाएगी।

सरकार की टीम ने पिछले कुछ दिनों में डल्लेवाल से मुलाकात की

सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जसकरन सिंह के नेतृत्व में पंजाब सरकार की एक टीम द्वारा पिछले कुछ दिनों में डल्लेवाल से मुलाकात करने और खनौरी में किसान नेताओं के साथ चर्चा किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कोहाड़ ने कहा कि एक बार कुछ ठोस सामने आने के बाद दोनों किसान संगठन अपना रुख स्पष्ट करेंगे। कोहाड़ ने कहा कि डल्लेवाल का वजन काफी कम हो गया है, उनके रक्तचाप में उतार-चढ़ाव हो रहा है और लंबे समय तक अनशन के कारण किडनी और लिवर सहित अन्य स्वास्थ्य मापदंडों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पंजाब सरकार से कहा कि उसके अधिकारी और कुछ किसान नेता मीडिया में यह गलत धारणा बना रहे हैं कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन खत्म कराने की कोशिश की जा रही है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि वह स्पष्ट करती है कि अदालत ने कभी भी डल्लेवाल का अनशन खत्म कराने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि वह केवल उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है और चाहती है कि उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए।

डल्लेवाल के समर्थन में खनौरी पहुंचे अन्य राज्यों के किसान नेता

शीर्ष अदालत ने डल्लेवाल की ओर से दायर एक नयी याचिका पर केंद्र को नोटिस भी जारी किया, जिसमें केंद्र सरकार को फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित वादों का पालन करने का निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया है। इस बीच, कुछ अन्य राज्यों के किसान नेता डल्लेवाल के समर्थन में खनौरी पहुंचे और मीडिया से बातचीत के दौरान किसान नेता लखविंदर सिंह औलख ने उनका परिचय कराया।

किसान संगठन ‘ऑल फार्मर्स एसोसिएशन, तमिलनाडु’ के नेता पी आर पांडियन ने कहा कि सभी किसान एकजुट हैं और किसानों की मांगों के समर्थन में डल्लेवाल की भूख हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। कर्नाटक के किसान नेता शांताकुमार ने कहा कि पंजाब के किसान देश के स्वतंत्रता आंदोलन की तरह ही अपना आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र से मुद्दे का तुरंत समाधान करने की मांग की।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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