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वेस्ट एशिया के हालात पर भारत सक्रिय: जयशंकर ने की ईरान के विदेश मंत्री से चर्चा,इस डिप्लोमैटिक पहल के क्या मायने?

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत का जोर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान पर बना हुआ है। इसी क्रम में भारतीय विदेश मंत्री ने अपने ईरानी समकक्ष से बात की है।

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जयशंकर ने ईरान के सैयद अब्बास अराघची से की बात (फाइल फोटो साभार: @IRIMFA_EN)

Photo : Twitter

पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच भारत ने एक बार फिर कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता दिखाई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के ताजा हालात पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच वर्तमान स्थिति को लेकर विस्तृत बातचीत हुई।

इससे पहले दिन में जयशंकर ने ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बदर बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से भी संपर्क किया था। इस दौरान भी दोनों के बीच पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट पर विचार-विमर्श हुआ था।

इससे पहले भी भारत संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान से संपर्क कर चुका है। छह दिनों के भीतर दूसरी बार हुई यह बातचीत इस बात का संकेत है कि भारत क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

भारत के लिए पश्चिम एशिया रणनीतिक रूप से बेहद अहम

भारत के लिए पश्चिम एशिया रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र है,क्योंकि यहां से देश की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आता है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी इन देशों में रहते हैं। ऐसे में नई दिल्ली कूटनीतिक स्तर पर हालात को शांत करने के प्रयासों में सक्रिय दिख रही है।

भारत ने की थी शांति की अपील

संघर्ष के शुरुआती दौर में हुई बातचीत के दौरान जयशंकर ने क्षेत्र की स्थिति पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा तनाव कम करने की अपील की थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा था कि भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदल रहे हालात को लेकर चिंतित है।

भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि मौजूदा संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। नई दिल्ली ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और बढ़ने से रोकने और देशों की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का आग्रह किया है।

खामेनेई की मौत के बाद ईरानी दूतावास पहुंचे थे विदेश सचिव मिसरी

इसी बीच विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा कर वहां रखी शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। यह शोक-पुस्तिका ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद रखी गई थी। खामेनेई की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के दौरान हुई थी। मिसरी ने इस मौके पर ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह से भी मुलाकात की। माना जा रहा है कि विदेश सचिव की यह यात्रा भारत की ओर से खामेनेई की मृत्यु पर पहला औपचारिक संकेत है। उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी को लेकर विपक्षी दलों ने पहले सवाल भी उठाए थे।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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