देश

जब भारत का इतिहास लिखा जाएगा, तो पीएम मोदी के कार्यकाल को स्वर्णिम अक्षरों में लिखना होगा; अमित शाह का दावा

Amit Shah's Big Claim: अमित शाह ने दावा किया है कि मोदी सरकार के सबसे कटु आलोचक भी उनकी सरकार के 10 साल को स्वर्ण अक्षरों में लिखेंगे। उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार के दस सालों के कार्यकल ने ‘गार्जियन’ अखबार के लेखक के लेख को सच साबित कर दिया है।'

Image

अमित शाह और पीएम मोदी।

Political News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब भारत का इतिहास लिखा जाएगा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे कटु आलोचकों को भी उनके पिछले 10 साल के शासन के बारे में स्वर्ण अक्षरों में लिखना होगा। ‘इंडियन रेनेसां: द मोदी डिकेड’ पुस्तक के विमोचन के मौके पर शाह ने दक्षिणी क्षेत्र के लिए अलग राष्ट्र की मांग करने वालों की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग भारत के दक्षिणी हिस्सों को मिलाकर एक अलग राष्ट्र बनाने की बात कर रहे हैं। देश पहले ही तीन राष्ट्रों में विभाजित हो चुका है। आप और कितने विभाजन चाहते हैं?'

पीएम मोदी के सबसे कटु आलोचकों को लेकर किया बड़ा दावा

गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 10 वर्ष एक नए युग की शुरुआत हैं। उन्होंने कहा, 'जब भारत का इतिहास लिखा जाएगा, तो प्रधानमंत्री मोदी के सबसे कटु आलोचकों को भी उनके पिछले 10 वर्षों के शासन के बारे में स्वर्ण अक्षरों में लिखना होगा।' शाह ने दावा किया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को जीत मिलने के बाद ‘द गार्जियन’ अखबार के एक पत्रकार ने भारत का अवलोकन करते हुए कहा था कि वैसे तो देश को 1947 में आजादी मिली थी लेकिन ब्रिटिश शासन से असली आजादी 2014 में मोदी के आने के बाद ही मिली है। उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार के दस सालों के कार्यकल ने ‘गार्जियन’ अखबार के लेखक के लेख को सच साबित कर दिया है।'

'ऐसी योजना लाने का काम किया है जो क्रांतिकारी बदलाव लाती है'

गृह मंत्री ने कहा कि जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अब जब वह प्रधानमंत्री हैं तो उन्होंने हमेशा हर साल एक ऐसी योजना लाने का काम किया है जो क्रांतिकारी बदलाव लाती है। शाह ने कहा कि आज देश में कोई भी ऐसा राष्ट्रीय नेता नहीं है जिसे 15 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिले हों। उन्होंने कहा, 'यह नरेंद्र मोदी हैं। यह उनके वैश्विक नेतृत्व का उदाहरण है।'

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को ‘शिव शक्ति बिंदु’ नाम दिए जाने का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि जब ऐसा किया गया तो इंटरनेट पर वैश्विक स्तर पर ‘शिव शक्ति’ के लिए एक करोड़ से अधिक बार सर्च किया गया और यह भारत की ताकत है। उन्होंने कहा, 'जब कोई व्यक्ति अपनी कड़ी मेहनत, दूरदर्शिता और सच्चे दिल से देश का नेतृत्व करता है तो इतिहास उसे नजरअंदाज नहीं कर सकता। इतिहास को उसकी ओर देखना ही होगा।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article