ESTIC 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत मंडपम में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2026 का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत भविष्य की टेक्नोलॉजी को अपनाएगा, साहस के साथ इनोवेशन करेगा और दुनिया में इसे बनाने में लीडर बनेगा। पीएम मोदी ने कहा, "भारत विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर रहा है। इस साल भारत ने AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की और अपना खुद का मॉडल भी लॉन्च किया। भारत में निर्मित चिप्स की पहली खेप अब दुनिया के बाकी हिस्सों तक पहुंचने लगी है। बैटरी स्टोरेज के क्षेत्र में भी हम भारत में उपलब्ध कच्चे माल के आधार पर क्षमता निर्माण पर काम कर रहे हैं। भारत उभरती प्रौद्योगिकियों में अपनी क्षमताओं और अपने आत्मविश्वास दोनों को मजबूत कर रहा है।"
भारत मंडपम में ESTIC 2026 शुरू
उन्होंने कहा कि भारत की एक और बड़ी ताकत बड़े पैमाने पर समाधान देने की क्षमता है। हमारा डिजिटल स्टैक इसका प्रमुख उदाहरण है। हमारी 5G तकनीक इसका एक और उदाहरण है। भारत सुरक्षित समाधानों को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पीएम ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दुनिया में लंबे समय से एक चुनौती रही है, इसे संभावित हथियार के रूप में देखा जाता है। भारत का नजरिया है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानवता की सेवा का माध्यम है।
'पहले प्रयास में ही मंगल पर पहुंचा भारत'
अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "हम पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचे। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचे। इस बदलाव को पिछले एक साल के कुछ उदाहरणों से बेहतर समझा जा सकता है।" विकसित भारत के विजन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता होगी। परमाणु ईंधन के लिए आयात पर हमारी निर्भरता हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती है। इसीलिए भारत तेजी से अपनी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक पर काम कर रहा है। कुछ महीने पहले ही देश के 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने अपनी पहली क्रिटिकलिटी हासिल की है।
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टेक्नोलॉजी में विस्तार करना भारत का लक्ष्य
पीएम मोदी ने कहा कि चाहे ऊर्जा सुरक्षा हो या तकनीक में आत्मनिर्भरता, भारत का लक्ष्य सिर्फ अपनी जरूरतों को पूरा करना नहीं है, बल्कि क्रिटिकल टेक्नोलॉजी में अपनी क्षमताओं का विस्तार करना भी है। अंतरिक्ष क्षेत्र में मिली सफलताओं पर उन्होंने कहा कि इस साल भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भी नए माइलस्टोन हासिल किए हैं। भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने मेड इन इंडिया रॉकेट का उपयोग करके अपने पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया। भारत ने सैटेलाइट डॉकिंग की क्षमता भी हासिल कर ली है। आज कई भारतीय स्टार्टअप अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इनोवेटिव समाधान लेकर आ रहे हैं।
