केंद्रीय चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी के दौरान सत्तारूढ़ दल टीएमसी के पक्ष में प्रचार करने के आरोप में एक राज्य सरकारी अधिकारी को निलंबित कर दिया है। आयोग ने ज्योत्सना खातून, जो खंडघोष विकास खंड में संयुक्त बीडीओ (Jt. BDO) के पद पर तैनात थीं और 259-खंडघोष विधानसभा क्षेत्र में सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) के रूप में अधिसूचित थीं, के खिलाफ यह कार्रवाई की है।
क्या है मामला?
दरअसल, चुनाव आयोग को रिपोर्ट मिली थी कि खंडघोष विकास खंड में संयुक्त बीडीओ के पद पर तैनात अधिकारी ज्योत्सना खातून ने खुलेआम टीएमसी के समर्थन में प्रचार किया था। आयोग ने इसे चुनाव आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया है।
ECI ने क्या दिया निर्देश?
- चुनाव अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश
- उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश
- 4 अप्रैल सुबह 11 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा गया
- खाली पद को भरने के लिए राज्य सरकार से तत्काल प्रस्ताव भेजने को कहा गया
बंगाल में पुलिस तैनाती में हुई 'लापरवाही' की समीक्षा करने का डीजीपी को निर्देश
इस बीच, पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले टीएमसी से कथित तौर पर जुड़े व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती का भारत निर्वाचन आयोग ने गंभीर संज्ञान लिया है। इस मामले को "चूक" बताते हुए चुनाव आयोग ने डीजीपी को जल्द से जल्द सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि चुनावों की घोषणा से पहले, पश्चिम बंगाल सरकार ने तृणमूल कांग्रेस से सीधे तौर पर जुड़े 832 लोगों और टीएमसी समर्थकों सहित 144 अन्य लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए 2,185 पुलिस कर्मियों को तैनात किया था। अब इसी का संज्ञान आयोग ने लिया है और निष्पक्ष समीक्षा करने को कहा है।
वहीं, आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह कार्रवाई चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
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