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पहले कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे एकनाथ शिंदे; उनके पुराने साथी ने किया बड़ा दावा

Maharashtra Politics: संजय राउत ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे पहले कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे। राउत ने कहा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि 2019 में महा विकास आघाडी (एमवीए) का गठन होगा या 2022 में (शिंदे के नेतृत्व में) एक "असंवैधानिक" सरकार सत्ता में आएगी या 2024 में देवेंद्र फडणवीस को पूर्ण बहुमत मिलेगा।

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एकनाथ शिंदे।

Sanjay Raut on Eknath Shinde: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने शनिवार को दावा किया कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे पहले कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे। हालांकि राउत ने उस वर्ष या महीने का उल्लेख नहीं किया जब शिंदे ने स्पष्ट रूप से ऐसा करने (पार्टी बदलने) की योजना बनाई थी। उन्होंने दिवंगत कांग्रेस नेता अहमद पटेल का हवाला दिया।

एकनाथ शिंदे को लेकर संजय राउत ने किया दावा

शिंदे द्वारा जून 2022 में किये गये विद्रोह के बाद अविभाजित शिवसेना दो धड़ों में बंट गई थी। राउत ने संवाददाताओं से कहा, "मुझे पता है कि क्या चल रहा था। अहमद पटेल अब जीवित नहीं हैं और इसलिए मैं इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहता, क्योंकि वह इस बात को प्रमाणित करने के लिए मौजूद नहीं हैं।" पटेल का 25 नवंबर 2020 को निधन हो गया। जब इस बारे में और पूछा गया तो राउत ने कहा, "इसके बारे में (वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री) पृथ्वीराज चव्हाण से पूछिए।"

पृथ्वीराज चव्हाण ने टिप्पणी करने से किया इनकार

समाचार एजेंसी 'पीटीआई भाषा' ने इस पर प्रतिक्रिया जानने के लिए संपर्क किया, तो चव्हाण ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एकनाथ शिंदे की प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी। महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने उपमुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदे और अजित पवार (राकांपा) को "मुख्यमंत्री का बारी-बारी से पद" देने के वादे के साथ विपक्षी गठबंधन में शामिल होने का "प्रस्ताव" देकर खलबली मचा दी थी। उन्होंने होली समारोह के दौरान ये टिप्पणियां कीं।

राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है- संजय राउत

प्रतिक्रिया मांगे जाने पर राउत ने कहा कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं निःशब्द हूं। मैं केवल इतना कह सकता हूं कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है।" राउत ने कहा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि 2019 में महा विकास आघाडी (एमवीए) का गठन होगा या 2022 में (शिंदे के नेतृत्व में) एक "असंवैधानिक" सरकार सत्ता में आएगी या 2024 में देवेंद्र फडणवीस को पूर्ण बहुमत मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे का बालासाहेब ठाकरे के भगवा ध्वज से कोई लेना-देना नहीं है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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