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टूटने वाला है BJP-शिवसेना गठबंधन! CM शिंदे के बेटे ने की इस्तीफे के पेशकश

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 10, 2023, 08:25 AM IST

Maharashtra Politics: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंद के बेटे व लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। श्रीकांत शिंदे ने कहा है कि अगर उनके काम से कोई नाराज होता है तो वह अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।

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श्रीकांत शिंदे

Photo : Twitter

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यहां फिर से सियासी खेल शुरू हो गया है। इस बार शिवसेना और भाजपा गठबंधन में दरार के संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंद के बेटे व लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं पर स्वार्थ की राजनीति के लिए गठबंधन को कमजोर करने का आरोप लगाया है। श्रीकांत शिंदे ने कहा है कि अगर उनके काम से कोई नाराज होता है तो वह अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।

श्रीकांत शिंदे का यह बयान हाल ही में कल्याण लोकसभा सीट को लेकर भाजपा के स्थानीय नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद आया है। इस बैठक में प्रस्ताव पास किया गया था कि इस सीट पर भाजपा अपने सहयोगी दल शिवसेना का समर्थन नहीं करेगी। इसके बाद से भाजपा और शिवसेना के गठबंधन के बीच सबकुछ ठीक नहीं होने की चर्चा है।

कुछ लोग गठबंधन में बाधाएं पैदा कर रहे

श्रीकांत शिंदे ने कहा है कि डोंबिवली के कुछ नेता अपनी स्वार्थी राजनीति के लिए गठबंधन के लिए बाधाएं पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे किसी पद की लालसा नहीं है। भाजपा-शिवसेना का वरिष्ठ नेतृत्व जो भी उम्मीदवार तय करेगा, मैं उसका समर्थन करूंगा। हमारा लक्ष्य फिर से भाजपा-शिवसेना गठबंधन बनाना है और केंद्र में भाजपा के साथ सरकार बनाना है। हम इस दिशा में जो काम कर रहे हैं, अगर कोई इसका विरोध करता है, अगर कोई नाराज है और गठबंधन में कोई गड़बड़ी होती है, तो मैं अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं।

कल्याण लोकसभा सीट को लेकर है पूरा खेल

बता दें, महाराष्ट्र की कल्याण लोकसभा सीट पर भाजपा की नजर है। इस सीट से वर्तमान में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंद के बेटे डॉ. श्रीकांत शिंदे सांसद हैं। चर्चा है कि भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में यहां से अपना उम्मीदवार उतारना चाहती है। ऐसे में अगर भाजपा और शिवसेना एक होकर चुनाव लड़ती हैं तो श्रीकांत शिंदे की उम्मीदवार पर खतरा मंडरा सकता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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