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कोलकाता रेप केस: आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के घर पर ED की रेड, कई ठिकानों पर भी पहुंची टीम

Kolkata Rape Case: कोलकाता रेप केस में घिरे आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के घर पर अन्य ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की है।

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संदीप धोष के घर पर ईडी ने की छापेमारी।

Photo : BCCL

Kolkata Rape Case: कोलकाता रेप केस में घिरे आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर बड़ी कार्रवाई हुई है। प्रवर्तन निदेशायल (ED) ने संदीप घोष के घर व अन्य ठिकानों पर छापेमारी की है। बता दें, ईडी ने वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पीएमएलए का मामला दर्ज किया था। इसके बाद ईडी की तरफ से इस मामले में यह पहली बड़ी कार्रवाई की गई है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम ने संदीप घोष से जुड़े तीन ठिकानों पर छापेमारी की है। ईडी के अधिकारी हावड़ा, सोनारपुर और हुगली स्थिति ठिकानों पर पहुंचे हैं। इसमें एक जगह संदीष घोष के करीबी रिश्तेदार का घर भी है। बतादें, संदीप घोष फिलहाल सीबीआई की हिरासत में हैं।

सीबीआई ने किया था गिरफ्तार

बता दें, कोलकाता में जूनियर डॉक्टर के साथ रेप और हत्या मामले में सीबीआई जांच कर रही है। बीते दिनों में सीबीआई ने इस मामले में संदीप घोष को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने कोर्ट में 10 दिन की हिरासत की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने संदीप घोष की 8 दिन की हिरासत को मंजूरी दी थी।

बंगाल सरकार ने भी की थी बड़ी कार्रवाई

इस मामले में संदीप घोष के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने भी बड़ी कार्रवाई की थी। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को निलंबित कर दिया था। इसके 24 घंटे के भीतर ही संदीप घोष की करीबी सहयोगी डॉ. बिरुपाक्ष बिस्वाल को भी निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं में उनकी गिरफ्तारी के बाद हुई है।

पीड़िता के पिता ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप

बता दें, जूनियर डॉक्टर से रेप और हत्या मामले में पीड़िता के पिता ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के पिता ने कहा है कि कोलकाता पुलिस ने मामले को दबाने के लिए शव का अंतिम संस्कार जल्दबाजी में कराने का दबाव बनाया था, इसके साथ ही पुलिस के बड़े अधिकारियों ने रिश्वत की पेशकश की थी, जिससे मामले को दबाया जा सके। उन्होंने कहा, हमें घंटों तक बेटी के शव को देखने तक नहीं दिया गया और इंतजार कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद हमें शव सौंपा गया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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