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Earthquake: भूकंप के झटकों से हिली दिल्ली-NCR की धरती, घरों से लोग बाहर निकले, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.4

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 13, 2023, 02:17 PM IST

Earthquake in Delhi-NCR: दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए। पंजाब और कश्मीर में भी धरती हिलने की खबर है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.4 बताई गई है।

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earthquake felt in delhi ncr

Earthquake in Delhi-NCR: दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए। पंजाब और कश्मीर में भी धरती हिलने की खबर है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.4 बताई गई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार भूकंप से जान-माल के नुकसान की अभी कोई खबर नहीं है। झटके महसूस होने के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूकंप के झटके भारत समेत पाकिस्तान और चीन में भी महसूस किए गए हैं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ से 30 किमी दक्षिण पूर्व में 5.4 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के झटके 1:33 मिनट पर महसूस किए गए। श्रीनगर के एक स्थानीय निवासी ने बताया, भूकंप के झटके पिछले सप्ताह आए भूकंप से ज्यादा तीव्र थे। उन्होंने बताया, भूकंप के बाद स्कूल के बच्चे डर गए और बाहर निकल आए। कई लोगों ने घरों पर पंखे हिलते हुए देखे।

म्यांमार में 3.7 तीव्रता का भूकंप

इससे पहले मंगलवार को म्यांमार में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.7 थी। राष्ट्रीय भूगर्भ विज्ञान केंद्र ने कहा कि भूकंप की गहराई जमीन से 10 किलोमीटर भीतर थी। इस भूकंप में भी किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। 31 मई को भी म्यांमार में भूकंप आया था। इसकी तीव्रता 5.7 थी। तिब्बत के शिजांग इलाके में भी आज भूकंप के झटके आए। यहां आए भूकंप की तीव्रता 4.3 थी।

मार्च में भी महसूस किए गए थे झटके

इससे पहले मार्च में भी भारत के कई राज्यों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। मार्च में दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड समेत पूरे उत्तर भारत में ये झटके महसूस किए गए थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का हिंदू कुश क्षेत्र था। भूकंप की तीव्रता 6.6 मापी गई थी।

प्लेटों के टकराने से आता है भूकंप

बता दें, भूकंप आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों की टकराहट है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, धरती के नीचे सात प्लेटें होती हैं, जो लगाचार चक्कर लगाती रहती हैं। जब कभी भी ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो धरती के नीचे की ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता खोजती है, इसी कारण भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। रिक्टर स्केल पर 2.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है और यह भूकंप महसूस नहीं किए जाते। वैज्ञानिकों का कहना है कि हर रोज लाखों भूकंप आते हैं, लेकिन ज्यादातर 2.0 से कम तीव्रता के होते हैं, जो महसूस नहीं किए जाते।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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