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'आज की राजनीति अपने हिसाब से तथ्यों को पेश करने की...' जयशंकर बोले- 'टीपू सुल्तान मामले में भी ऐसा हुआ'

S Jaishankar on Tipu Sultan: जयशंकर ने कहा कि टीपू सुल्तान इतिहास में एक बेहद जटिल शख्सियत हैं। एक तरफ, उन्हें ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष करने वाले एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। दूसरी तरफ, कई बार स्थानीय प्रतिद्वंदियों से भी संघर्ष किया।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर।

S Jaishankar on Tipu Sultan: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टीपू सुल्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इतिहास बहुत जटिल है और आजकल की राजनीति तथ्यों को अपने हिसाब से चुनकर पेश करने की है और टीपू सुल्तान के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। उन्होंने दावा किया कि मैसूर के पूर्व शासक टीपू सुल्तान के बारे में पिछले कुछ वर्षों में एक विशेष विमर्श प्रचारित किया गया। जयशंकर ने यह बातें 'टीपू सुल्तान: द सागा ऑफ मैसूर इंटररेग्नम 1761-1799' पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहीं। यह पुस्तक इतिहासकार विक्रम संपत ने लिखी है।

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ बुनियादी सवाल हैं, जिनका आज हम सभी को सामना करना पड़ रहा है कि हमारे अतीत को कितना छिपाया गया है। जटिल मुद्दों को कैसे नजरअंदाज किया गया है और कैसे तथ्यों को शासन की सुविधा के अनुसार ढाला गया है।

इतिहास में जटिल व्यक्ति हैं टीपू सुल्तान

जयशंकर ने कहा कि टीपू सुल्तान इतिहास में एक बेहद जटिल शख्सियत हैं। एक तरफ, उन्हें ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष करने वाले एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। दूसरी तरफ, कई बार स्थानीय प्रतिद्वंदियों से भी संघर्ष किया। उन्होंने कहा, इतिहास को समझने में अक्सर पक्षपाती दृष्टिकोण अपनाया जाता है और टीपू सुल्तान के बारे में भी ऐसा ही हुआ है। जयशंकर ने कहा टीपू सुल्तान के शासन का मैसूर क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, साथ ही आज भी कई क्षेत्रों में, यहां तक कि मैसूर में भी उनके शासन को लेकर काफी नकारात्मक भावनाएं हैं।

खास नैरेटिव को दिया गया बढ़ावा

विदेश मंत्री ने कहा, भारतीय इतिहास में टीपू सुल्तान के ब्रिटिशों के साथ युद्धों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है, जबकि, उनके शासन के अन्य पहलुओं की अनदेशी की गई है। जयशंकर ने आगे कहा, इतिहास की जटिलताओं को समझने के बजाए तथ्यों को चुनिंदा रूप से पेश करने से एक राजनीतिक नैरेटिव को बढ़ावा मिलता है। टीपू सुल्तान के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। टीपू और अंग्रेजों के संघर्ष पर जोर देने से एक खास नैरेटिव को वर्षों तक बढ़ावा दिया गया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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