BRICS के विदेश मंत्रियों की बैठक गुरुवार से दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस सम्मेलन के लिए दुनिया भर से पहुंचे सदस्य देशों के मंत्रियों एवं ऑब्जवर्र का स्वागत किया। जयशंकर ने सबसे पहले स्वागत भारत में चीन के राजदूत शू फेहांग का किया। चीन के विदेश मंत्री वांग यी इस समय बीजिंग में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी चीन में हैं। इसलिए यी भारत नहीं आए हैं। रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव भी भारत पहुंचे हैं।
ईरान-UAE के विदेश मंत्रियों का स्वागत
इसके बाद विदेश मंत्री ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियानो, दक्षिण अफ्रीका रोनाल्ड लामबोला और इथियोपिया के गेडियोन टिमोथेवोस हेसेबोन का स्वागत किया। समारोह स्थल पर जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का भी स्वागत किया। यूएई के विदेश मंत्री खालिफा शाहीन अल मरार का भी स्वागत जयशंकर ने किया।
सम्मेलन की मेजबानी चौथी बार कर रहा भारत
उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह ब्रिक्स के साथ भारत अपने संबंध लगातार मजबूत मना बना रहा है। दो दिन के इस सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, बहुपक्षीय सुधार, कारोबार एवं विकास की चुनौतियों सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। इस बार ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता भारत के पास है। यह चौथी बार है जब भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। भारत इसके पहले 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर चुका है।
2006 में 4 देशों ने की BRICS की स्थापना
इसकी स्थापना 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने की थी। 2010 में दक्षिण अफ्रीका भी इस समूह में शामिल हो गया जिसके बाद यह ब्रिक्स बन गया। इस समूह का लक्ष्य प्रभावशाली विकासशील देशों को एकजुट करना और उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में अमीर देशों के प्रभुत्व को चुनौती देना है। विकसित देशों के संगठन जी-7 के मुकाबले इसकी पहचान विकासशील देशों के मजबूत गठबंधन के रूप में हो रही है। विश्व व्यापार में 16 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण समूह है, जिसमें विश्व की 41 प्रतिशत आबादी शामिल है।
