EAM Jaishankar Slams Pakistan At UNGA: संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर आतंकी देश पाकिस्तान बेनकाब हुआ और उसकी जमकर बेइज्जती हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरते हुए दुनिया को सच्चाई से रूबरू कराया। जयशंकर ने कहा कि भारत आजादी के बाद से ही आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहा है जबकि उसका पड़ोसी देश पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद का केंद्र रहा है। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र की आम बहस को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान की सीमा पार बर्बरता का सबसे ताजा उदाहरण पहलगाम हमला है। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से दुनिया भर के नेताओं को संबोधित करते हुए भारत की जनता की ओर से नमस्कार के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। जयशंकर के भाषण की 10 बड़ी बातें जानिए।
जयशंकर के भाषण की 10 बड़ी बातें
- विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया और पहलगाम आतंकी हमले के दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया।
- जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया और चेतावनी दी कि जो लोग आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों का समर्थन करते हैं, उन्हें आतंकवाद का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों का दावा करते हुए, हमें खतरों का भी दृढ़ता से सामना करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद का मुकाबला करना एक विशेष प्राथमिकता है क्योंकि यह कट्टरता, हिंसा, असहिष्णुता और भय को जन्म देता है।
- जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए भारत की जनता का नमस्कार के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की और कहा कि भारत ने आजादी के बाद से ही इस चुनौती का सामना किया है, क्योंकि उसका पड़ोसी वैश्विक आतंकवाद का केंद्र है।
- जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया, लेकिन जब उन्होंने कहा कि दशकों से, बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हमलों के पीछे उसी एक देश का हाथ होता है, तो उनका इशारा स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में उस देश के नागरिकों के नाम भरे पड़े हैं।
- उन्होंने कहा, सीमा पार बर्बरता का सबसे ताजा उदाहरण इस साल अप्रैल में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या थी। भारत ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपने लोगों की रक्षा करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया और इसके आयोजकों और अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया।
- जयशंकर ने चेतावनी दी कि जो लोग आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों का समर्थन करते हैं, उन्हें वापस उन्हीं पर हमला झेलना पड़ेगा। आतंकवाद को एक साझा खतरा बताते हुए, उन्होंने गहन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया।
- उन्होंने कहा, जब राष्ट्र खुले तौर पर आतंकवाद को राज्य की नीति घोषित करते हैं, जब आतंकवादी अड्डे औद्योगिक पैमाने पर संचालित होते हैं, जब आतंकवादियों का सार्वजनिक रूप से महिमामंडन किया जाता है, तो ऐसी कार्रवाइयों की स्पष्ट रूप से निंदा की जानी चाहिए।
- उन्होंने कहा, आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाई जानी चाहिए, भले ही प्रमुख आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाए गए हों। पूरे आतंकवाद पारिस्थितिकी तंत्र पर निरंतर दबाव डाला जाना चाहिए।
- विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से विश्व नेताओं से कहा कि भारत समकालीन विश्व के साथ तीन प्रमुख अवधारणाओं, 'आत्मनिर्भरता', 'आत्मरक्षा' और 'आत्मविश्वास' के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा है।
- उन्होंने कहा, हम देश और विदेश में अपने लोगों की रक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए दृढ़ हैं। इसका अर्थ है आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता, अपनी सीमाओं की मज़बूत सुरक्षा, विदेश में साझेदारी बनाना और विदेश में अपने समुदाय की सहायता करना।
शहबाज शरीफ को करारा जवाब
इससे पहले शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन पर अपने जवाब के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए, भारत ने कहा था कि 9 मई तक पाकिस्तान भारत पर और हमले करने की धमकी दे रहा था। लेकिन 10 मई को उसकी सेना ने हमसे सीधे तौर पर लड़ाई रोकने की अपील की। इस बीच, भारतीय सेना द्वारा कई पाकिस्तानी हवाई अड्डों को तबाह कर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने शुक्रवार को शरीफ को जवाब देते हुए कहा कि 'बर्बाद रनवे, जले हुए हैंगर्स को PAK अगर जीत मानकर इतराता है तो उसका स्वागत है। पाकिस्तान ऐसा देश है जो आतंकवाद का महिमामंडन और बेतुके पाखंड करता है। भारतीय राजनयिक ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाक की जीत के दावे का उपहास भी उड़ाया।
