देश

NEET प्रोटेस्ट के बाद चर्चा में Rule 267, जानिए क्या है राज्यसभा का यह विशेष नियम और क्यों होता है कम इस्तेमाल?

दिल्ली में नीट पेपर लीक को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस की तरफ से लाठी चार्च और अत्यधित बल प्रयोग किया गया। इस दौरान आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। वहीं, पैलेट गन के इस्तेमाल के भी दावे किए गए हैं। अब इसी को लेकर विपक्ष ने संसद में चर्चा की मांग की गई है। ​​तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर सदन में तत्काल चर्चा की मांग की है।

Image

राज्यसभा। Credits: Rajya Sabha TV

NEET पेपर लीक को लेकर राजधानी दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC)की राज्यसभा उपनेता सागरिका घोष ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर सदन की कार्यसूची स्थगित कर इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि आखिर राज्यसभा का नियम 267 है क्या और यह कब लागू होता है। साथ ही यह भी कि इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' क्यों कहा जाता है?

सबसे पहले बात अभी की, क्यों शुरू हुई इसकी चर्चा

दरअसल, राजधानी दिल्ली में नीट पेपर लीक को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस की तरफ से लाठी चार्च और अत्यधित बल प्रयोग किया गया। इस दौरान आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। वहीं, पैलेट गन के इस्तेमाल के भी दावे किए गए हैं। अब इसी को लेकर विपक्ष ने संसद में चर्चा की मांग की गई है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर सदन में तत्काल चर्चा की मांग की है। अपने नोटिस में उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सोमवार, 27 जुलाई 2026 को सुबह 11 से दोपहर 12 बजे और दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही स्थगित कर NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग के मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराई जाए। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षा बलों ने घातक और अर्ध-घातक बल का इस्तेमाल किया। नोटिस में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा कथित तौर पर पेलेट गन चलाने, एक छात्र की आंख की रोशनी प्रभावित होने की आशंका और सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा छात्रों के साथ हिंसक व्यवहार के आरोपों का भी जिक्र किया गया है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया है कि पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी और इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने किन प्रोटोकॉल का पालन किया। सांसद ने नियम 267 के तहत सदन का अन्य कामकाज स्थगित कर इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है।

विपक्ष की क्या हैं मांगे?

विपक्ष ने नियम 267 के तहत जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की मांग की है,उनमें 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई, प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया जाना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कथित चुप्पी की मांग शामिल है।

वहीं,राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विपक्ष की मांग पर कहा कि नियम 267 का इस्तेमाल अब तक केवल "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" यानी अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही किया गया है।

क्या है राज्यसभा का नियम 267?

राज्यसभा की कार्यवाही से जुड़े नियम 267 के तहत कोई भी सदस्य किसी अत्यंत महत्वपूर्ण और तत्काल सार्वजनिक महत्व के विषय पर चर्चा कराने के लिए सदन की तय कार्यवाही को स्थगित करने का अनुरोध कर सकता है।

यदि सभापति (या उनकी अनुपस्थिति में उपसभापति) इस मांग को स्वीकार करते हैं, तो सदन की पहले से निर्धारित कार्यसूची को रोककर उस विषय पर चर्चा कराई जा सकती है।

इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' क्यों माना जाता है?

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा है कि नियम 267 का इस्तेमाल केवल "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" यानी बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाता है। इसकी वजह यह है कि यदि हर महत्वपूर्ण राजनीतिक या सार्वजनिक मुद्दे पर सूचीबद्ध कार्यवाही रोक दी जाए, तो सदन का नियमित कामकाज प्रभावित होगा। इसलिए इस नियम का प्रयोग बहुत सीमित परिस्थितियों में ही किया जाता है और इसका अंतिम फैसला सभापति के विवेक पर निर्भर करता है।

क्या किसी भी मुद्दे पर मिल सकती है चर्चा?

नहीं। दिसंबर 2025 में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया था कि नियम 267 का उद्देश्य किसी भी विषय पर तत्काल बहस कराना नहीं है। उन्होंने कहा था कि इस नियम के तहत केवल उन मामलों पर विचार किया जा सकता है जो उस दिन की सूचीबद्ध कार्यवाही से जुड़े हों। सूचीबद्ध कार्यवाही से बाहर के विषयों पर दिए गए नोटिस सामान्यतः स्वीकार नहीं किए जाते।

लोकसभा के स्थगन प्रस्ताव से कैसे अलग है?

अक्सर नियम 267 की तुलना लोकसभा के Adjournment Motion (स्थगन प्रस्ताव) से की जाती है, लेकिन दोनों अलग-अलग प्रावधान हैं। सभापति ने स्पष्ट किया है कि राज्यसभा का नियम 267, लोकसभा के स्थगन प्रस्ताव का विकल्प नहीं है। दोनों की प्रक्रिया और उद्देश्य अलग हैं। नियम 267 केवल विशेष परिस्थितियों में कार्यवाही से जुड़े नियमों को निलंबित करने का प्रावधान देता है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

और पढ़ें
End of Article