Twisha Case: मृतक बेटी से बेहतर है तलाकशुदा बेटी...आज जब ट्विशा केस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई तब यह वाक्य कोर्ट रूम में गूंज उठा। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रख रहे थे, तभी उन्होंने यह टिप्पणी की। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि वो ट्विशा के परिवार से सहानुभूति रखते हैं। दरसअल ट्विशा केस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है।
मीडिया रिपोर्टिंग पर क्या बोले मेहता
तुषार मेहता ने न्यायालय से कहा कि ट्विशा की सास ने टीवी चैनलों पर आकर पीड़िता को बदनाम करने वाले बयान देने शुरू किए जिसके बाद मीडिया कवरेज शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि मीडिया के हस्तक्षेप के कारण मामले में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मेहता ने कहा कि यह मामला सभी माता-पिता के लिए एक संदेश है कि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करने से बेहतर है कि बेटी का तलाक हो जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल के इस अभ्यावेदन पर गौर किया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के समक्ष यह मामला उठाएंगे कि सीबीआई जांच तत्काल अपने हाथ में ले। पीठ ने कहा, ’’हम पीड़िता के परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं ताकि जारी जांच पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े या कोई पूर्वाग्रह नहीं हो।’’ पीठ ने कहा, ’’हम मीडिया से भी अनुरोध करते हैं कि वह ऐसे लोगों के बयान रिकॉर्ड करने से बचे जो संभावित गवाह हैं, क्योंकि इससे उन मुद्दों के निष्कर्षों पर अनावश्यक प्रभाव पड़ सकता है जिनकी जांच की जानी है।’’
सुप्रीम कोर्ट की अपील
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मीडिया से मामले से जुड़े घटनाक्रम की रिपोर्टिंग करते समय संयम बरतने को कहा। कोर्ट ने कहा कि वह इस विमर्श से ’’व्यथित’’ है कि न्यायपालिका आरोपियों को बचा रही है। न्यायालय ने साथ ही कहा कि वह इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित जांच सुनिश्चित करेगा। पीठ ने कहा, ’’कुछ कार्रवाइयों से हम व्यथित हैं। हम मीडिया में अपने मित्रों से अनुरोध करेंगे कि वे पीड़िता के परिवार या दूसरे पक्ष के परिवार के बयान लेने से बचें। चीजों को कानून और प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए।’’ उसने कहा, ’’हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार के बयान रिकॉर्ड न करे और उनके दर्द को महज ’साउंड बाइट’ बनाकर पेश न करे।’’
