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देवेंद्र फडणवीस का नाम महाराष्ट्र के CM पद के लिए तय; भाजपा नेता ने कर दिया ये बड़ा दावा

Maharashtra CM Face: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन विराजमान होगा? इसके लिए नाम तय हो चुका है। खुद भाजपा के नेता ने ये दावा किया है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस का नाम तय हो गया है। समाचार एजेंसी ने ये दावा भाजपा नेता के हवाले से किया है।

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देवेंद्र फडणवीस ही बनेंगे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री?

Devendra Fadnavis for CM of Maharashtra: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने रविवार रात को बताया कि महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के तौर पर देवेंद्र फडणवीस का नाम तय हो गया है। पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भाजपा विधायक दल की बैठक दो या तीन दिसंबर को होगी।

मुंबई के आजाद मैदान में होगा शपथ ग्रहण समारोह

भाजपा की महाराष्ट्र इकाई ने कहा है कि नयी महायुति सरकार का शपथ ग्रहण समारोह पांच दिसंबर की शाम को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में होगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसमें शामिल होंगे। फडणवीस दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनका दूसरा कार्यकाल कुछ दिनों का था। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली निवर्तमान सरकार में फडणवीस उपमुख्यमंत्री थे।

कैसा रहा है देवेंद्र फडणवीस का राजनीतिक सफर?

पार्षद से लेकर नागपुर के सबसे युवा महापौर और फिर महाराष्ट्र के भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने तक देवेंद्र फडणवीस का राजनीतिक सफर स्थिर रहा है और विधानसभा चुनावों में पार्टी के शानदार प्रदर्शन से ऐसा लगता है कि वह तीसरी बार राज्य के शीर्ष पद पर आसीन होंगे। मराठा राजनीति एवं नेताओं के प्रभुत्व वाले राज्य में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि वाले 54 वर्षीय नेता फडणवीस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पुरानी सहयोगी शिवसेना के मनोहर जोशी के बाद राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले दूसरे ब्राह्मण हैं।

साल 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले, मृदुभाषी नेता इस प्रतिष्ठित पद के लिए स्पष्ट रूप से पहली पसंद थे, जिसका मुख्य कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह दोनों का उन पर विश्वास था। मोदी ने एक चुनावी रैली में उनके बारे में कहा था, ‘‘देवेंद्र देश को नागपुर का उपहार हैं।’’ मोदी ने 2014 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हालांकि धुआंधार प्रचार किया था, लेकिन चुनाव में पार्टी की अभूतपूर्व जीत का कुछ श्रेय प्रदेश भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष फडणवीस को भी गया था।

पहली बार कब विधानसभा पहुंचे थे देवेंद्र फडणवीस?

फडणवीस ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1999 में लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार तीन विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। वह निवर्तमान राज्य विधानसभा में नागपुर दक्षिण पश्चिम सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। महाराष्ट्र के कई नेताओं के विपरीत, फडणवीस भ्रष्टाचार के आरोपों से बेदाग रहे हैं। महाराष्ट्र के सबसे मुखर नेताओं में से एक, फडणवीस को कथित सिंचाई घोटाले को लेकर राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) सरकार को घेरने का श्रेय भी दिया जाता है। फडणवीस को 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद झटका लगा, जब तत्कालीन संयुक्त शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद को लेकर चुनाव पूर्व गठबंधन छोड़ दिया, जिससे भाजपा नेता का बहुप्रचारित ‘‘मी पुन्हा येईं (मैं फिर आऊंगा) नारा उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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