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Parliament संसद में बाढ़ बना मुद्दा, इन 5 सांसदों ने सरकार के सामने रखी अपनी-अपनी मांग

Parliament News: बाढ़ प्रभावित राज्यों को केंद्रीय सहायता दिए जाने की राज्यसभा में मांग उठी। भाजपा, टीएमसी, कांग्रेस और माकपा के सांसदों ने सरकार के सामने अपनी-अपनी मांग रखी। विपक्षी सांसद ने ये मांग की असम और बंगाल में पुनर्वास के लिए धन दीजिए। आपको बताते हैं कि किसने क्या कहा।

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राज्यसभा में उठा बाढ़ का मुद्दा।

Flood in India: राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने नर्सों को सम्मानजनक वेतन और गरिमापूर्ण जीवन देने, बाढ़ प्रभावित राज्यों को पर्याप्त केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने और सफाई कर्मचारियों की दुर्घटनाओं में मुत्यु होने पर मुआवजा में भेदभाव नहीं बरतने की मांग उठाई। इस दौरान कुछ सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में रेल सुविधाओं को बढ़ाने और स्वीकृत रेल परियोजनाओं में तेजी लाने की भी मांग की।

1). माकपा सांसद वीके शिवदासन ने कर दी ये मांग

केरल से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वीके शिवदासन ने देश में नर्सों की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रति 1,000 की जनसंख्या पर तीन नर्स होनी चाहिए लेकिन देश में यह संख्या इसका आधा भी नहीं है। उन्होंने कहा, 'देश को 60 लाख नर्सों की आवश्यकता है। यहां पर्याप्त अस्पताल तक नहीं हैं। हमारे पास पर्याप्त नर्सें नहीं हैं और नर्सों को उचित वेतन नहीं मिल रहा है।' उन्होंने कहा कि देश में नर्स और रोगी का अनुपात भी पर्याप्त नहीं है। नर्सों को प्रतिदिन 9 से 14 घंटे काम करना पड़ता है और उनका शुरुआती वेतन न्यूनतम वेतन से भी काफी कम है।

उन्हें बहुत प्रतिकूल नियमों और शर्तों के साथ काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। शिवदासन ने कहा, 'वे बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं। उनकी अच्छी आय, करियर के लक्ष्य और नर्सिंग समुदाय की गरिमा सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है।' उन्होंने सरकार से इस दिशा में उपयुक्त कदम उठाए जाने की मांग की।

2). टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने कहा- हमें निधि चाहिए

तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव ने असम और पश्चिम बंगाल में भीषण बाढ़ का मुद्दा उठाया और कहा कि इससे दोनों राज्यों में भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ आती है लेकिन अभी तक कोई योजना उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा, 'राज्यों को पर्याप्त निधियां दीजिए। यह मत कहिए कि उत्तर बंगाल को अलग कर दिया जाना चाहिए और बराक घाटी को अलग कर दिया जाना चाहिए। हमें निधि चाहिए। बाढ़ को रोकने के लिए हमें समाधान दीजिए। असम और बंगाल में पुनर्वास के लिए धन दीजिए।'

3). क्या बोले भाजपा सांसद अजीत माधवराव गोपचड़े?

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अजीत माधवराव गोपचड़े ने नांदेड़-बीदर रेल लाइन को 2018-19 के बजट में मंजूरी दिए जाने के बावजूद आज तक इसके पूरा न होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में आज तक कोई ठोस करवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र और कर्नाटक के आध्यात्मिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए नांदेड-बीदर रेल लाइन निर्माण को तत्काल शुरू करने की कृपा करें।

4). कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने सफाई कर्मचारियों का मुद्दा उठाया

कांग्रेस की जेबी माथेर ने सफाई कर्मचारियों का मुद्दा उठाया और कहा कि वे बिना किसी सुरक्षा कवच और उचित प्रशिक्षण के काम करते हैं और इस कारण अक्सर उन्हें चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने उनकी स्थिति में सुधार लाने और दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवजे की व्यवस्था करने का आग्रह किया।

5). बीजेपी सांसद मदन राठौड़ ने मांगी दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन

भाजपा के मदन राठौड़ ने पाली जिला मुख्यालय से जयपुर और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा आरंभ करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पाली कपड़ा उद्योग का हब है और इस कारण वहां के लोगों का अक्सर जयपुर और दिल्ली आना-जाना लगा रहता है। उन्होंने कहा कि एक भी ट्रेन ऐसी नहीं है जो वहां से रात्रि में खुलती हो और सुबह जयपुर या दिल्ली पहुंचाए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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