Delhi Turkman Gate Bulldozer Action: दिल्ली के तुर्कमान गेट पर मंगलवार देर रात जबरदस्त हंगामा हुआ। दरअसल, बुलडोजर एक्शन के दौरान अवैध अतिक्रमण हटाया गया। इस दौरान लोगों ने सड़क पर उतरकर पथराव किया। बता दें कि अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई फैज-ए-इलाही मस्जिद (Faiz-e-ilahi) के आसपास हुई।
अवैध दुकानें और दूसरे निर्माण हटाने के लिए देर रात 30 से ज्यादा बुलडोजर पहुंचे। इसी बीच बड़ी तादाद में लोगों ने घटनास्थल पर पहुंचकर इस कार्रवाई का विरोध किया। विरोध करने वालों में रामपुर के समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिब्बुलाह नदवी भी थे। लोगों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई और पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर रात में हुआ क्या?
- मंगलवार रात करीब 12 बजे पुलिस बल को तुर्कमान गेट के पास तैनात किया गया। इसके करीब आधे घंटे बाद, यानी साढ़े 12 बजे के आसपास, नगर निगम की कार्रवाई के लिए 32 बुलडोजर, 50 डंपर और 200 से ज्यादा मजदूर मौके पर पहुंचे।
- प्रशासन की योजना के मुताबिक रात 1 बजे बुलडोजर चलने थे, लेकिन इसी दौरान इलाके में लोगों की भीड़ जमा होने लगी।
- हालात को देखते हुए पुलिस ने करीब 1:15 बजे लोगों को वहां से हटाना शुरू किया। इसी बीच 1:23 बजे अचानक पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। करीब दस मिनट तक मौके पर अफरा-तफरी और बवाल की स्थिति बनी रही।
- हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ना शुरू किया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
- तनाव के बावजूद प्रशासन ने पीछे हटने के बजाय कार्रवाई जारी रखी। रात करीब 1:30 बजे बुलडोजर की कार्रवाई शुरू कर दी गई, जो लगातार करीब साढ़े पांच घंटे तक चली। सुबह 7 बजे तक अवैध निर्माण हटाने का काम चलता रहा।
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी निधिन वलसन ने मीडिया से कहा, "क़रीब 25-30 लोगों ने पुलिस टीम पर पथराव किया जिसमें पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोट लगी है। स्थिति नियंत्रण में करने के लिए हमें आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। यहां एक बैंक्वेट हॉल और डिस्पेंसरी थी जिसे तोड़ा गया है। ये कार्रवाई रात में की गई है ताकि इससे स्थानीय लोगों को परेशानी ना हो।
हाईकोर्ट ने क्या दिया था आदेश?
बीते 12 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद के पास बने निर्माण को अवैध करार देते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया था।
यह आदेश ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ की याचिका पर आया था, जिसमें मस्जिद से सटे इलाके में अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया था। अदालत के मुताबिक, मस्जिद के आसपास करीब 39 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में अतिक्रमण पाया गया था।
मस्जिद समिति का दावा और कार्रवाई
मस्जिद समिति ने इस जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। समिति से जुड़े जावेद खान ने कहा था कि जिस जमीन को प्रशासन अपनी बता रहा है, वहां पहले कब्रिस्तान मौजूद था और इससे जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश किए जाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि मामले में एकतरफा सुनवाई हो रही है और अगर फैसला उनके खिलाफ आया तो वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। अदालती प्रक्रिया जारी रहने के बीच मंगलवार देर रात अतिक्रमण का हिस्सा हटा दिया गया।
MCD ने क्या की थी शिकायत?
दिसंबर में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने जांच के बाद यह स्पष्ट किया था कि 0.195 एकड़ में बनी फ़ैज-ए-इलाही मस्जिद को छोड़कर उसके आसपास मौजूद अन्य निर्माण अवैध हैं। एमसीडी का कहना था कि दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड या मस्जिद की प्रबंधन समिति मस्जिद के निर्धारित क्षेत्र से बाहर की ज़मीन पर अपने स्वामित्व से जुड़े ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सकी।
एमसीडी के अनुसार, अतिक्रमण के दायरे में आने वाले हिस्से में एक डिस्पेंसरी बनाई गई थी और एक बारात घर संचालित किया जा रहा था। हालांकि, कार्रवाई से पहले मस्जिद समिति ने इन दोनों प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया था।
बता दें कि फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और मलबा हटाने का काम जारी है। प्रशासन की ओर से साफ किया गया है कि यह पूरी कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश पर की गई थी और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
