दिल्ली हाईकोर्ट में लालू यादव की याचिका पर सुनवाई आज; IRCTC घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश को दी है चुनौती
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 5, 2026, 12:00 AM IST
13 अक्टूबर को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिया था। कोर्ट ने इस मामले में आईपीसी की धारा 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।
लालू प्रसाद यादव
दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार यानी आज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई कर सकता है। इस याचिका में उन्होंने आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। ये मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सूचीबद्ध है।
अपनी याचिका में, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख ने दावा किया है कि आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों के लिए आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में राउज एवेन्यू कोर्ट के उनके और अन्य परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी गई है।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय करने का दिया था आदेश
बता दें कि 13 अक्टूबर को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिया था। कोर्ट ने इस मामले में आईपीसी की धारा 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।
क्या है मामला
सीबीआई के मुताबिक, यह मामला 5 जुलाई 2017 को दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते हुए मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड (एसएचपीएल) के मालिक विजय कोचर और विनय कोचर सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित बीएनआर (बंगाल रेलवे नागपुर) होटलों की लीजिंग में अनियमितताएं कीं।
पद के दुरुपयोग के आरोप
एजेंसी के अनुसार, लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आईआरसीटीसी के कई अधिकारियों की मिलीभगत से कोचर ब्रदर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया। इसके एवज में पटना स्थित एक कीमती भूमि को कोचर ब्रदर्स ने एक ऐसी कंपनी को बेच दिया जो लालू प्रसाद यादव के करीबी और राजद के राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता से जुड़ी थी। यह जमीन मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (डीएमसीपीएल) के नाम से खरीदी गई थी, जिसे बाद में लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी के नाम से परिवर्तित कर दिया गया। यह कंपनी लालू परिवार के हित में संचालित की जा रही थी और अंततः इस संपत्ति का नियंत्रण राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव के हाथों में चला गया। सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करने के बाद लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, प्रेमचंद गुप्ता और अन्य 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
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