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कैंपा एनर्जी ड्रिंक पर FSSAI के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट ने रोका, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने दी थी चुनौती

एफएसएसएआई ने ‘कैंपा एनर्जी ड्रिंक-गोल्ड बूस्ट’ से ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द हटाने का निर्देश दिया था। एफएसएसएआई ने इस बाबत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को पत्र भी लिखा था। इसी मामले में अब रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड को अब राहत मिली है।

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दिल्ली हाईकोर्ट से रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को राहत।

Photo : PTI

रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने कैंपा एनर्जी ड्रिंक-गोल्ड बूस्ट को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से जारी आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को एफएसएसएआई की ओर से जारी आदेश और इसके बाद 17 जुलाई 2026 को जारी पत्र, दोनों पर रोक लगाई है। अदालत ने इन आदेशों के आधार पर अब तक उठाए गए कदमों पर भी रोक लगा दी है।

एफएसएसएआई ने क्या निर्देश दिया था?

दरअसल, एफएसएसएआई ने 30 जून के अपने आदेश में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड को निर्देश दिया था कि वह अपने उत्पाद ‘कैंपा एनर्जी ड्रिंक-गोल्ड बूस्ट’ के नाम या विवरण से ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द हटा दे।

इसके बाद 17 जुलाई को एफएसएसएआई की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को पत्र भेजा गया था। इसमें उनसे एफएसएसएआई के निर्देश को लागू कराने के लिए जरूरी कार्रवाई करने को कहा गया था। यानी मामला सिर्फ रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड तक सीमित नहीं था, बल्कि एफएसएसएआई ने देशभर के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी इस निर्देश को लागू कराने के लिए कहा था।

बिना नोटिस और सुनवाई के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने एफएसएसएआई के आदेश पर रोक लगाते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को महत्वपूर्ण माना है। रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड की ओर से दलील दी गई कि एफएसएसएआई ने आदेश जारी करने से पहले कंपनी को न तो कारण बताओ नोटिस दिया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर एफएसएसएआई के 30 जून के आदेश और उसके बाद जारी 17 जुलाई के पत्र पर रोक लगा दी।

अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि किसी कंपनी के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया गया या नहीं।

देशभर में लागू कराया जाना था एफएसएसएआई का आदेश

एफएसएसएआई के 17 जुलाई के पत्र के बाद इस मामले का दायरा और बड़ा हो गया था। पत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को निर्देश दिया गया था कि वे 30 जून के आदेश को लागू कराने के लिए जरूरी कदम उठाएं। हाईकोर्ट की रोक के बाद फिलहाल इस आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई पर भी रोक रहेगी।

रिलायंस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी पेश हुए

मामले में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने पैरवी की। उन्हें करंजावाला एंड कंपनी की टीम ने सहयोग दिया। टीम का नेतृत्व वरिष्ठ पार्टनर रूबी सिंह आहूजा ने किया। उनके साथ अधिवक्ता रवनीत कौर मलिक, पीयूष शर्मा, अभ्युदय मिश्रा और वाणी असवाल भी मामले में पेश हुए। दिल्ली हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद ‘कैंपा एनर्जी ड्रिंक-गोल्ड बूस्ट’ से ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द हटाने वाला एफएसएसएआई का आदेश फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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