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सड़कों पर पहुंचा यमुना का पानी, जानिए 1978 की बाढ़ से कितनी तबाह हुई थी दिल्ली

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 12, 2023, 09:14 PM IST

Delhi Flood Alert: यमुना नदी का जलस्तर उफान पर है। ऐसे में लोगों को एक बार फिर से 1978 की त्रासदी याद आ गई है। दरअसल, 6 सितंबर 1978 में अचानक से दिल्ली के पॉश इलाकों में यमुना नदी में बाढ़ आ गई थी।

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यमुना नदी में बाढ़

Photo : ANI

Delhi Flood Alert: दिल्ली में यमुना नदी उफान पर है। यहां बाढ़ का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। सुबह यमुना का जलस्तर खतरे के निशान(205.33 ) मीटर से करीब दो मीटर ऊपर था। शाम छह बजे तक के अपडेट के मुताबिक, हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर बढ़कर 207.81 मीटर तक पहुंच गया है, जिससे कई इलाके जलमग्न होने का खतरा भी बढ़ गया है।

खबर है कि उफान मारती यमुना का पानी मोनेस्ट्री और आईएसबीटी के बीच रिंग रोड पर आ गया है, जिससे यातायात भी प्रभावित हो रहा है। वहीं यमुना नदी के आसपास निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस आया है। दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारे पर बसे लोगों को सुरक्षित इलाकों में जाने की सलाह दी है साथ ही लोगों से लगातार यमुना नदी के किनारे न जाने की अपील की जा रही है।

यमुना के उफान ने दिलाई 1978 की याद

यमुना नदी का जलस्तर उफान पर है। ऐसे में लोगों को एक बार फिर से 1978 की त्रासदी याद आ गई है। दरअसल, 6 सितंबर 1978 में अचानक से दिल्ली के पॉश इलाकों में यमुना नदी में बाढ़ आ गई थी। बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुसने लगा था और लोगों को अपने-अपने घरों को छोड़ दूसरी जगह शरण लेने लगी थी। तब यमुना का जलस्तर 207.49 मीटर पहुंचा था। इस बार जलस्तर इस लेवल को क्रॉस कर गया है।

18 की गई थी जान लाखों लोग हुए थे बेघर

यमुना नदी में तब आई बाढ़ के कारण राजधानी क्षेत्र की करीब 40 हजार वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि पानी में डूब गई थी और लोगों की फसल बर्बाद हो गई थी। इतना ही नहीं, आंकड़ों के मुताबिक, तब 18 लोगों की जान गई थी और लाखों लोग बेघर हो गए थे। करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। जानकारी के मुताबिक, इस बाढ़ के कारण उत्तरी दिल्ली के 30 गांव बाढ़ में डूब गए थे और नजफगढ़ नाले में उफान के कारण जनकपुरी और उत्तम नगर समेत कई इलाकों के 72 गांव जलमग्न हो गए थे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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