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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ FIR दर्ज करने से कोर्ट का इनकार, जानें क्या है मामला?

Mallikarjun Kharge: अदालत ने कहा कि आरोप है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक चुनावी रैली में कुछ भाषण दिया था, जिसमें भाजपा और आरएसएस के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की गई थीं। चूंकि शिकायतकर्ता आरएसएस सदस्य है, इसलिए वह इन टिप्पणियों से व्यथित है।

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कांग्रेस अध्य्क्ष मल्लिकार्जुन खड़गे

Photo : Twitter

Mallikarjun Kharge: दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने अप्रैल 2023 में कर्नाटक में एक चुनावी रैली में भाजपा और आरएसएस के खिलाफ अभद्र भाषा का आरोप लगाने वाली शिकायत पर संज्ञान लिया है। अदालत ने कहा कि मामले में कथित आरोपी की पहचान पहले ही हो चुकी है और सभी सबूत शिकायतकर्ता के पास हैं, इसलिए एफआईआर की कोई जरूरत नहीं है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) चतिंदर सिंह ने सभी दलीलें सुनने और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पर विचार करने के बाद एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा, इस मामले में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत पुलिस द्वारा जांच की कोई जरूरत नहीं है, इसलिए आवेदन को खारिज किया जाता है। हालांकि, अदालत ने आरएसएस के सदस्य एडवोकेट रविंदर गुप्ता द्वारा दायर शिकायत का संज्ञान लिया है।

अदालत ने क्या कहा?

इस मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि आरोप है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक चुनावी रैली में कुछ भाषण दिया था, जिसमें भाजपा और आरएसएस के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की गई थीं। चूंकि शिकायतकर्ता आरएसएस सदस्य है, इसलिए वह इन टिप्पणियों से व्यथित है। अदालत ने कहा, शिकायतकर्ता के पास आरोपियों के साथ-साथ उन गवाहों का पूरा विवरण है, जिनकी जांच की जानी है। इस मामले में न तो बरामदगी की जरूरत है और न ही ऐसे किसी भौतिक साक्ष्य को इकट्ठा करने की जरूरत है, जो केवल पुलिस ही कर सकती है। अदालत ने कहा कि बाद में यदि अदालत को यह आवश्यक लगता है कि पुलिस द्वारा जांच की आवश्यकता है तो वह उस उद्देश्य के लिए धारा 202 सीआरपीसी का सहारा ले सकती है।

क्या है मामला?

आरोप है कि खड़गे ने 27 अप्रैल, 2023 को अपने भाषणा में नफरत भरी भाषा का प्रयोग किया था। कर्नाटक के गडग के नारेगल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते उन्होंने हुए पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ तीखी टिप्पणी की। ऐसे में शिकायतकर्ता आरएसएस सदस्य होने के नाते खुद को बदनाम महसूस कर रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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