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4500 एकड़ में बनने वाला डीसा एयरबेस भारत के लिए इस वजह से है खास

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 19, 2022, 12:50 PM IST

गांधीनगर डिफेंस एक्स्पो में पीएम नरेंद्र मोदी ने डीसा एयरबेस बनाए जाने का ऐलान किया। गुजरात के बनासकांठा में बनने वाला यह एयरबेस पाकिस्तान के संदर्भ में भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है इसे समझने की आवश्यकता है।

KEY HIGHLIGHTS
  • बनासकांठा जिले में है डीसा
  • वर्तमान में 1 हजार मीटर का रनवे
  • 4500 एकड़ में बनेगा एयरबेस

गुजरात के गांधीनगर में डिफेंस एक्स्पो के उद्घाटन भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सशक्त देश ही दुनिया के पटल पर अपनी मौजूदगी को दमदार तरीके से दर्ज करा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें अपनी पेशेवर क्षमता को बढ़ाने के साथ साथ उच्च किस्म के साजो सामान पर भी जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय फौज से जब भी जरूरत पड़ी या देश पर संकट आया अपनी उपयोगिता को साबित किया है। इसके साथ ही उन्होंने एक नए एयरबेस को बनाए जाने का ऐलान किया जो गुजरात के बनासकांठा जिले में डीसा में होगा। अब सवाल यह है कि जब गुजरात में पहले से ही भुज में एयरबेस मौजूद है तो डीसा की जरूरत क्यों आन पड़ी। डीसा के जरिए भारत आखिर क्या संदेश देना चाहता है। हर एक पहलू को हम यहां विस्तार से बताएंगे।

गुजरात के बनासकांठा में बनेगा डीसा एयरबेस

गुजरात के बनासकांठा जिले के डीसा में बनने वाले नए एयरबेस की आधारशिला आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने DefExpo गांधीनगर से रख दी है। अब भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिएएक नए रक्षा एयरबेस की तैयारी शुरू हो सकेगी। एयरबेस स्थापित करने का निर्णय केंद्र द्वारा 2020 में लिया गया था। इसमें कम से कम 1,000 करोड़ रुपये के निवेश होगा।इस एयरबेस की रनवे नई पीढ़ी के विमानों की आवाजाही को संभालने के लिए सक्षम होगी जिसमें बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर भी शामिल है।

एक नजर में डीसा एयरबेस

  • दक्षिण पश्चिमी वायुकमान के लिए रणनीतिक स्थान
  • महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान की सुरक्षा के लिए अहम
  • एयरबेस बनाने में 1 हजार करोड़ का निवेश
  • वायुसेना की परिचालन सीमा में विस्तार
  • भारत- पाक सीमा से महज 130 किमी दूर

4500 एकड़ में बनेगा एयरबेस

2024 तक पूरे एयरबेस की स्थापना कर दी जाएगी। इस एयरबेस की स्थापना के लिए लगभग 4,500 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है, जो भारत-पाक सीमा से लगभग 130 किमी दूर स्थित होगी और यह निकटता पश्चिमी सीमा पर भारतीय वायु रक्षा में हवाई दूरी को कम करने में मदद करेगी।इसलिए, एयरबेस दक्षिण पश्चिम वायु कमान के लिए एक रणनीतिक स्थान होगा जिसे महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, एयरबेस युद्ध की स्थिति में भारतीय लड़ाकू विमानों की परिचालन सीमा का विस्तार करेगा। इसएयरबेस की पूरी योजना सैन्य अभियंता सेवा MES द्वारा क्रियान्वित की जाएगी।

डीसा में वर्तमान में 1000 मीटर का रनवे

डीसा में वर्तमान में लगभग 1,000 मीटर के रनवे के साथ केवल एक ही हवाई पट्टी है, जिसका उपयोग नागरिक और चार्टर विमान संचालन और वीवीआईपी के लिए हेलीकॉप्टर लैंडिंग के लिए किया जाता है। डीसा एयरबेस अंतरराष्ट्रीय सीमा से निकटता को देखते हुए रक्षा विमानों को उतारने और उतारने का विकल्प प्रदान करेगा।

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