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Train Accident:'रेल हादसों में आई गिरावट, 'कवच', VCD,और हाईटेक मॉनिटरिंग से बड़ा बदलाव...' बोले रेल मंत्री

Train Accident: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 2014 तक जहां हर साल औसतन 171 ट्रेन हादसे होते थे, अब 2025 में घटकर सिर्फ 3 रह गए हैं।

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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (फाइल फोटो: canva)

Train Accident: भारतीय रेलवे ने हाल के सालों में सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 2004-14 के दौरान हर साल औसतन 171 ट्रेन दुर्घटनाएं होती थीं, जो घटकर 2024-25 में सिर्फ 31 और 2025-26 में (अब तक) केवल 3 रह गई हैं। यह जानकारी रेल मंत्री ने राज्यसभा में दी है और इसके अलावा रेलवे के सुरक्षा को लेकर जितनी तैयारी प्रयास किया जा रहे हैं उसके बारे में भी बताया।

2004–14 के बीच कुल 1,711 ट्रेन हादसे हुए थे (औसतन 171 हर साल),

जो घटकर 2024–25 में 31 और 2025–26 (जून तक) में सिर्फ 3 रह गए हैं।

2014–15 में 1 लाख किलोमीटर ट्रेन दूरी पर 0.11 हादसे होते थे,

जो 2024–25 में घटकर 0.03 रह गया – 73% की कमी।

रेलवे ने सुरक्षा पर खर्च बढ़ाकर 2024–25 में ₹1.14 लाख करोड़ कर दिया है,

जो 2013–14 में ₹39,000 करोड़ था।

Fog Safety Device (धुंध में ट्रेन चलाने में मदद करने वाला उपकरण) की संख्या

2014 में केवल 90 थी, जो अब 25,939 हो गई है।

रेल फ्रैक्चर (पटरी टूटना) 2013–14 में 2,548 थे, अब 2024–25 में घटकर 289 हो गए।

Electronic Interlocking Stations (इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से सिग्नल नियंत्रण)

की संख्या 837 से बढ़कर अब 3,691 हो गई है।

सभी अनमैंड (बिना गेटमैन वाले) लेवल क्रॉसिंग 2019 तक हटा दिए गए हैं।

रेलवे ने Kavach नामक आधुनिक सेफ्टी सिस्टम अपनाया है

जो लोको पायलट को ट्रेन की टक्कर से रोकने में मदद करता है।

रेलवे ने क्या-क्या किया सुरक्षा बढ़ाने के लिए?

तकनीकी सुधार:

हाई क्वालिटी रेल ट्रैक और लंबी रेल पैनल का उपयोग।

इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग सिस्टम को कई गुना बढ़ाया गया।

धुंध में चलाने के लिए GPS आधारित उपकरण लगाना।

बेहतर रखरखाव:

ट्रैक की नियमित जांच, अल्ट्रासोनिक तकनीक से पटरी में दरारों की पहचान।

पुराने कोच हटा कर LHB कोच (आधुनिक और सुरक्षित) लगाए जा रहे हैं।

ट्रैक पर गश्त और ऑटोमेटिक निगरानी सिस्टम का उपयोग।

बुनियादी ढांचे का विकास:

नए ट्रैक, पुल, अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए गए।

मशीनों से पटरी बिछाने का कार्य बढ़ाया गया जिससे मानवीय गलती कम हुई।

आग से बचाव के लिए कोच में फायर अलार्म और suppression सिस्टम लगाए गए हैं।

भविष्य की तैयारी:

दिल्ली–मुंबई और दिल्ली–हावड़ा जैसे व्यस्त रूट पर ‘कवच’ सिस्टम को तेजी से लागू किया जा रहा है।

सभी स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग पूरी हो रही है ताकि ट्रेन की लोकेशन सटीक तरीके से ट्रैक हो सके।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस और RPF की तैनाती।

bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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