देश

सावधान! कहीं आपके भी तो नहीं हो रही साइबर धोखाधड़ी? बेरोजगार युवाओं, गृहणियों और छात्रों को किया जा रहा टारगेट

Cyber ​​Frauds: आज के दौर में आए दिन साइबर क्राइम से जुड़ी खबरें सामने आती रहती हैं। इसी बीच एक रिपोर्ट में सामने आया है कि बेरोजगार युवाओं, गृहणियों और छात्रों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में क्या कुछ है, आपको बताते हैं।

Image

सांकेतिक फोटो।

Photo : iStock

Union Home Ministry Latest Annual Report: एक नया साइबर घोटाला सामने आया है, जिसमें बेरोजगार युवाओं, गृहणियों, छात्रों और जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाया जाता है और वे प्रतिदिन बड़ी रकम गंवा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे “पिग बुचरिंग स्कैम” या “निवेश घोटाले” के रूप में भी जाना जाता है। इसमें कहा गया है कि साइबर अपराधी इन अपराधों को शुरू करने के लिए गूगल सेवा मंच का भी उपयोग कर रहे हैं। इसमें कहा गया, “गूगल विज्ञापन मंच सीमा पार से लक्षित विज्ञापन के लिए एक आसान सुविधा प्रदान करता है। ‘पिग बुचरिंग स्कैम’ या ‘निवेश घोटाला’ के रूप में जाना जाने वाला यह घोटाला एक वैश्विक मामला है और इसमें बड़े पैमाने पर धन शोधन और यहां तक कि 'साइबर स्लेवरी' भी शामिल है।”

अलग-अलग तरीके से लोगों के ठग रहे हैं साइबर अपराधी

माना जाता है कि 2016 में चीन में शुरू हुआ ‘पिग बुचरिंग स्कैम’ भोले-भाले व्यक्तियों को निशाना बनाता है, जिनका साइबर अपराधी समय के साथ भरोसा जीतते हैं और अंततः उन्हें क्रिप्टोकरेंसी या किसी अन्य आकर्षक योजना में निवेश करने के लिए राजी कर लेते हैं और फिर उनकी रकम चोरी कर लेते हैं। ‘पिग बुचरिंग’ की उपमा सूअरों को मारे जाने से पहले उन्हें खिला पिलाकर मोटा किये जाने से आई है। इस खतरे पर अंकुश लगाने के लिए गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने समय-समय पर तत्काल कार्रवाई के लिए खतरे की खुफिया जानकारी साझा करने के वास्ते गूगल के साथ साझेदारी की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराधी भारत में अवैध रूप से ऋण देने वाले ऐप शुरू करने के लिए प्रायोजित फेसबुक का उपयोग कर रहे हैं। इसमें कहा गया, “ऐसे लिंक की सक्रिय रूप से पहचान की जाती है और आवश्यक कार्रवाई के लिए उन्हें फेसबुक तथा फेसबुक पेजों के साथ साझा किया जाता है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाट्सऐप भारत में साइबर अपराधियों द्वारा संभवतः दुरुपयोग किया जाने वाला सबसे बड़ा सोशल मीडिया मंच बना हुआ है।

व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम, फेसबुक के जरिए हुई ठगी

“साइबर अपराध की शिकायतें जहां बड़े प्रौद्योगिकी मंच का दुरुपयोग किया गया” पर रिपोर्ट में प्रकाशित आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च 2024 तक 14,746 शिकायतें व्हाट्सऐप से संबंधित थीं, 7,651 टेलीग्राम के खिलाफ, 7,152 इंस्टाग्राम के खिलाफ, 7,051 फेसबुक के खिलाफ और 1,135 यूट्यूब के खिलाफ थीं। रिपोर्ट में कहा गया, “साइबर अपराधियों की पहचान करने और उन पर कार्रवाई करने में बड़ी टेक कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सक्रिय कार्रवाई के लिए खुफिया जानकारी और संकेत साझा करने के लिए आई4सी ने गूगल और फेसबुक के साथ साझेदारी की है।”

मंत्रालय ने एक साइबर स्वयंसेवक ढांचा भी शुरू किया है

रिपोर्ट में कहा गया कि आई4सी की राष्ट्रीय साइबर अपराध जोखिम विश्लेषणात्मक इकाई (एनसीटीएयू) पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का विश्लेषण करती है और साइबर अपराध के नवीनतम रुझानों और सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के दुरुपयोग पर विश्लेषण रिपोर्ट तैयार करती है। इसमें कहा गया, “इन रिपोर्टों को सभी संबंधित हितधारकों, यानी बैंकों, वॉलेट्स, व्यापारियों, भुगतान एग्रीगेटर्स, भुगतान गेटवे, ई-कॉमर्स और अन्य विभागों के साथ साझा किया जाता है ताकि निवारक उपाय किए जा सकें और उनके मंचों/सेवाओं के दुरुपयोग को कम किया जा सके।”

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने एक साइबर स्वयंसेवक ढांचा भी शुरू किया है, जो नागरिकों को इंटरनेट पर गैरकानूनी सामग्री की रिपोर्टिंग, साइबर स्वच्छता के प्रसार और कानून प्रवर्तन में सहायता के लिए साइबर विशेषज्ञ के रूप में साइबर स्वयंसेवक के तौर पर नामांकन करने में सक्षम बनाता है, जिसके तहत 31 मार्च 2024 तक 54,833 स्वयंसेवकों ने पंजीकरण कराया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article