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Chhattisgarh Accident: सीआरपीएफ के जवानों से भरी बस पलटी, घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल

Dantewada: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां सीआरपीएफ जवानों से भरी एक बस दुर्घटना का शिकार हो गई। इस हादसे में कई जवान घायल हो गए हैं। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

CRPF Jawans Bus Accident: केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों से भरी बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाडा में सीआरपीएफ के जवानों से भरी बस पलट गई। हादसे में कई लोग घायल हो गए। जिसके बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने घायल जवानों को जिला अस्पताल पहुंचाया।

जगदलपुर से दंतेवाड़ा जिले की ओर जा रहे थे जवान

सीआरपीएफ के जवान सड़क मार्ग से यात्रा कर रहे थे, इस दौरान अचानक वह पलट गई। ये हादसा बस्तर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा पर बास्तानार घाट पर हुआ। बताया जा रहा है कि हादसा उस वक्त हुआ जब जवान जगदलपुर से दंतेवाड़ा जिले की ओर जा रहे थे।

दंतेवाड़ा में ही चार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया

इससे पहले रविवार को ही छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में तीन महिला नक्सलियों और एक पुरुष नक्सली ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों पर कुल 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि इसके साथ ही जून 2020 में शुरू किए गए 'लोन वर्राटू' (स्थानीय गोंडी बोली में बोले जाने वाला शब्द जिसका अर्थ है अपने घर/गांव वापस लौटो) अभियान के तहत अब तक दंतेवाड़ा में 872 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों के बारे में जानिए

पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि एक दंपति समेत चार नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने बताया कि इनमें से हुंगा तामो उर्फ तामो सूर्या (37) और उसकी पत्नी आयती ताती (35) माओवादियों की क्षेत्रीय कंपनी नंबर 2 में सक्रिय थे और दोनों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। राय ने बताया कि वे 2018 में छत्तीसगढ़-तेलंगाना अंतरराज्यीय सीमा पर पामडे (बीजापुर) के जंगलों में सुरक्षाकर्मियों पर हुए हमले में कथित रूप से संलिप्त थे।

उन्होंने बताया कि दो महिला नक्सलियों देवे उर्फ विज्जे (25) और माडवी पर क्रमश: तीन लाख रुपये और एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। राय ने बताया कि पड़ोसी सुकमा जिले के रहने वाले इन चारों लोगों को 25-25 हजार रुपये की सहायता दी गई है और सरकार की नीति के अनुसार उनका पुनर्वास किया जाएगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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