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महाराष्ट्र में सीट शेयरिंग को लेकर शुरू हुई उठापटक, कांग्रेस ने ठुकराई उद्धव गुट की मांग

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 28, 2023, 03:27 PM IST

Lok Sabha Elections: उद्धव गुट वाली शिवसेना ने महाराष्ट्र की 48 में से 23 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया था। हालांकि, इस बार परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी को लगता है कि उद्धव गुट की सीटों को लेकर मांग बहुत अधिक है।

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उद्धव ठाकरे

Photo : BCCL

Lok Sabha Elections: 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग को लेकर उठापटक मची हुई है। अभी तक गठबंधन के नेता सीटों के बंटवारे का कोई फार्मूला नहीं तय कर पाए हैं। इसको लेकर जल्द ही बैठक की बात कही जा रही है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन वाले राज्यों में लोकसभा सीटों को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।

सामने आया है कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव को लेकर महाराष्ट्र में अपने सहयोगी दल शिवसेना (यूबीटी) की 23 सीटों की मांग खारिज कर दी है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब महाराष्ट्र विकास अघाड़ी गठबंधन के नेताओं के बीच बातचीत हुई। इस बैठक में उद्धव गुट वाले शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा के नेता मौजूद रहे।

23 सीटों पर किया था उद्धव गुट ने दावा

बता दें, उद्धव गुट वाली शिवसेना ने महाराष्ट्र की 48 में से 23 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया था। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि पार्टी हमेशा से 23 सीटों पर चुनाव लड़ती आ रही है। हालांकि, इस बाद परिस्थितियां अलग हैं और शिवसेना दो फाड़ हो चुकी है और अधिकांश नेता एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना के साथ हैं। इस बीच कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा कि शिवसेना के उद्धव ठाकरे के गुट को एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पार्टी के विभाजन के कारण उसके पास पर्याप्त उम्मीदवारों की कमी है।

उद्धव गुट की मांग बहुत ज्यादा

पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने कहा कि पार्टियों के बीच समायोजन की जरूरत है। उन्होंने कहा, हर पार्टी सीटों की बड़ी हिस्सेदारी चाहती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए शिवसेना की 23 सीटों की मांग अत्यधिक है। जानकारी के मुताबिक, गठबंधन की बैठक में कांग्रेस प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि शिवसेना और शरद पवार की राकांपा में विभाजन के बाद, कांग्रेस स्थिर वोट शेयर वाली एकमात्र पार्टी है। बता दें, पिछले हफ्ते, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा था कि उन्होंने पार्टी नेताओं उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के साथ, हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ-साथ एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ बातचीत की थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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