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अमरावती में कांग्रेस पर बरसे पीएम मोदी, बोले-'टुकड़े-टुकडे़ गैंग चला रही पार्टी'

Narendra Modi Amravati Speech: प्रधानमंत्री मोदी ने अमरावती में कहा, जो कांग्रेस हम देख रहे हैं, ये वो कांग्रेस नहीं है, जिससे कभी महात्मा गांधी जैसे महापुरुष जुड़े थे। आज की कांग्रेस में देशभक्ति की आत्मा दम तोड़ चुकी है। आज की कांग्रेस में नफरत का भूत दाखिल हो गया है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

Photo : ANI

Narendra Modi Amravati Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। वह वर्धा में पीएम विश्वकर्मा योजना की पहली वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा प्रहार किया। पीएम मोदी ने कहा कि ये वो कांग्रेस नहीं है, जिससे कभी महात्मा गांधी जैसे महापुरुष जुड़े थे। ये वो कांग्रेस है, जिसे टुकड़े-टुकडे़ गैंग और अर्बन नक्सल के लोग चला रहे हैं।

पीएम मोदी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि आज जो कांग्रेस हम देख रहे हैं, ये वो कांग्रेस नहीं है, जिससे कभी महात्मा गांधी जैसे महापुरुष जुड़े थे। आज की कांग्रेस में देशभक्ति की आत्मा दम तोड़ चुकी है। आज की कांग्रेस में नफरत का भूत दाखिल हो गया है। आज कांग्रेस के लोगों की भाषा और बोली विदेशी धरती पर जाकर उनके देश विरोधी एजेंडे समाज को तोड़ने, देश को तोड़ने की बात करना, भारतीय संस्कृति और आस्था का अपमान करना। ये वो कांग्रेस है, जिसे टुकड़े-टुकडे़ गैंग और अर्बन नक्सल के लोग चला रहे हैं। आज देश की सबसे बेईमान और सबसे भ्रष्ट पार्टी कांग्रेस है, देश का कोई सबसे भ्रष्ट परिवार है, तो वो कांग्रेस का शाही परिवार है।

सीजेआई के घर गणपति पूजा पर भी बोले मोदी

इस दौरान उन्होंने एक बार फिर सीजेआई डीवीआई चंद्रचूड़ के घर गणेश पूजा में शामिल होने पर कांग्रेस को जवाब दिया। पीएम मोदी ने कहा कि जिस पार्टी में आस्था और संस्कृति का जरा सा भी सम्मान होगा वो पार्टी कभी गणपति पूजा का विरोध नहीं कर सकती। आज की कांग्रेस को गणपति पूजा से भी नफरत है। महाराष्ट्र की धरती गवाह है कि आजादी की लड़ाई में लोकमान्य तिलक के नेतृत्व में गणपित उत्सव भारत की एकता का उत्सव बन गया था। गणेश उत्सव में हर एक समाज और हर वर्ग के लोग एक साथ जुड़ते थे। इसलिए कांग्रेस पार्टी को गणपति पूजा से भी चिढ़ है।

कांग्रेस ने गणपति बप्पा को सलाखों के पीछे डाला

उन्होंने आगे कहा कि मैं गणेश पूजन कार्यक्रम में चला गया, तो कांग्रेस के तुष्टिकरण का भूत जाग उठा। कांग्रेस गणपति पूजा का विरोध करने लगी। तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस कुछ भी कर रही है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने गणपति बप्पा को ही सलाखों के पीछे डाल दिया। गणपति की जिस मूर्ति की लोग पूजा कर रहे थे। पुलिस वैन में कैद करवा दिया। देश गणपति जी के अपमान को देखकर आक्रोशित है। मैं हैरान हूं कि इस पर कांग्रेस के सहयोगी के मुंह पर भी ताला लग गया है। उन पर भी कांग्रेस की संगत का ऐसा रंग चढ़ा है कि उनमें गणपति के अपमान का विरोध करने की हिम्मत नहीं बची है। हमें एकजुट होकर कांग्रेस के इन पापों का जवाब देना है।

भाजपा सरकार ने दलित और पिछड़ा विरोधी सोच खत्म की

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर वार करते हुए कहा कि हमारे पारंपरिक कौशल में सबसे ज्यादा भागीदारी एससी/एसटी और ओबीसी समाज के लोगों की रही है। अगर पिछली सरकारों ने विश्वकर्मा बंधुओं की चिंता की होती, तो इस समाज की कितनी बड़ी सेवा होती। लेकिन, कांग्रेस और उसके दोस्तों ने एससी/एसटी/ओबीसी को जानबूझकर आगे नहीं बढ़ने दिया। हमने सरकारी सिस्टम से कांग्रेस की इस दलित और पिछड़ा विरोधी सोच को खत्म किया है। पिछले 1 साल के आंकड़े बताते हैं कि आज विश्वकर्मा योजना का सबसे ज्यादा लाभ एससी/एसटी और ओबीसी समाज उठा रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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