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कांग्रेस ने भाजपा से पूछे 5 सवाल, पीएम मोदी के असम दौरे से पहले तेज किए हमले; जानें क्या कुछ कहा

पीएम मोदी के असम दौरे से पहले एक्शन मोड में कांग्रेस नजर आ रही है। कांग्रेस ने भाजपा से 5 सवाल पूछे। कांग्रेस ने पूछा कि असम में भूमि हड़पने सहित बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घोटालों के लिए कौन जिम्मेदार है? इसके साथ ही कई नेताओं ने प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा किया।

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पीएम मोदी के असम दौरे से पहले कांग्रेस ने भाजपा से पूछे 5 सवाल

Congress asked 5 questions to BJP: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के असम दौरे से पहले सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कई सवाल पूछे हैं। कांग्रेस ने भ्रष्टाचार, अवैध रैट होल माइनिंग, बेरोजगारी, असम की कानून व्यवस्था समेत कई मुद्दों को लेकर भाजपा और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से प्रश्न किए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, जितेंद्र सिंह, गौरव गोगोई, भूपेन कुमार बोरा, देबब्रत सैकिया, रकीबुल हुसैन ने मीडिया को संबोधित किया।

भाजपा के कुशासन से गहरे संकट में है असम; कांग्रेस का दावा

कांग्रेस पार्टी ने कहा कि असम भाजपा के कुशासन से गहरे संकट में है। पीएम मोदी 'एडवांटेज असम 2.0 शिखर सम्मेलन' का उद्घाटन करेंगे। लेकिन, लगता है कि वे अपने विफल 'वाइब्रेंट गुजरात' शिखर सम्मेलन मॉडल को अब असम में लागू कर रहे हैं। बेरोजगारी अपने चरम पर है। असम की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। कानून और व्यवस्था व्यावहारिक रूप से मृत है। कानून का इस्तेमाल केवल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। अवैध अप्रवासियों से निपटने में भाजपा का पाखंड पूरी तरह से उजागर हो गया है।

कांग्रेस ने कहा कि सीएम सबसे खराब तरह की विभाजनकारी राजनीति कर रहे हैं। असम की संस्कृति को नष्ट किया जा रहा है। चाय बागानों के श्रमिकों को दुख और गरीबी का शिकार बनाया जा रहा है। असम के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। विकास ठप है। निवेश केवल कागजों पर है। भाजपा के 2016-2025 विजन डॉक्यूमेंट के बड़े-बड़े वादे एक बड़ा जुमला साबित हुए हैं।

कांग्रेस ने पीएम मोदी और सीएम हिमंता बिस्वा सरमा से 5 सवाल पूछे।

पहला- असम में भूमि हड़पने सहित बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घोटालों के लिए कौन जिम्मेदार है?

दूसरा- असम की युवा बेरोजगारी दर देश में सबसे ज्यादा क्यों है? भाजपा ने असम के युवाओं का भविष्य क्यों बर्बाद कर दिया है?

तीसरा- भाजपा अपने 2016 के विजन दस्तावेज में असम के लोगों से किए गए एक भी वादे को पूरा क्यों नहीं कर पाई है, जिसे 2025 तक पूरा किया जाना था?

चौथा- असम में कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने में भाजपा पूरी तरह विफल क्यों रही है? पुलिस का राजनीतिकरण क्यों किया जा रहा है? केवल राजनीतिक विरोधियों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? सीएम ने जातिवादी और सांप्रदायिक बयान क्यों दिए हैं?

पांचवा- भाजपा असम समझौते को बनाए रखने में विफल क्यों रही है? अवैध प्रवासियों और अवैध विदेशियों के निर्वासन के मुद्दे पर पाखंड के लिए कौन जिम्मेदार है?

गौरव गोगोई ने ये कहा कि नरेंद्र मोदी ने 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' का नारा दिया। लेकिन असलियत में एक ऐसी वाशिंग मशीन बनाई, जिसके ब्रांड एंबेसडर हिमंता बिस्वा सरमा हैं, क्योंकि BJP खुद हिमंता पर लगाए गए अपने आरोपों को भूल चुकी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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