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'जो करेगा जात-पात की बात, उसे मार दी जाएगी लात'; नितिन गडकरी को मिला कांग्रेस और उद्धव की शिवसेना का साथ

Maharashtra Politics: आखिर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ऐसा क्या कह दिया कि उन्हें अब विपक्षी पार्टियों का साथ मिलने लगा। कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूटीबी) के नेताओं ने गडकरी का समर्थन कर दिया। उन्होंने ये तक कह दिया कि मुस्लिमों को मुख्य धारा में लाना होगा। आपको सारा माजरा समझाते हैं।

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नितिन गडकरी।

Opposition support of Nitin Gadkari: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ‘मुस्लिम समाज को सबसे ज्यादा शिक्षा की जरूरत’ वाले बयान पर राजनीतिक दलों के नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया आ रही है। इस बीच, कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने नितिन गडकरी के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मैं भी नितिन गडकरी के बयान से सहमत हूं।

सरकार और पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं गडकरी

कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने रविवार को कहा, 'अगर नितिन गडकरी ने कहा है तो ये बड़ी बात है। भाजपा में रहकर अगर वह इस तरह की बातें करते हैं तो कुछ तो कारण होगा। वह हमेशा अपनी अलग सोच के लिए जाने जाते हैं, इसलिए वह सरकार और पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं। जहां तक मुस्लिम समाज में शिक्षा की आवश्यकता का सवाल है तो सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि वे बहुत ही पिछड़े हुए हैं और नौकरी से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में काफी कमजोर भी हैं। अगर हमें पूरे देश को मजबूत बनाना है तो मुस्लिम समाज को मुख्य धारा में लाना होगा।'

उद्धव की पार्टी के नेता ने भी नितिन गडकरी का किया समर्थन

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'वे (नितिन गडकरी) अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं और भाजपा नेताओं को आईना दिखाने का काम करते हैं। जब देखो, तब विकास की बजाय पार्टी हिंदू-मुसलमान, मंदिर-मस्जिद और नफरत की राजनीति कर रही है। गडकरी ने तो यहां तक कह दिया कि जो जात-पात की बात करेगा, उसे लात मार दी जाएगी।'

उन्होंने आगे कहा, 'पिछले 10 साल से केंद्र में भाजपा और राज्य में भी भाजपा की सरकार है और उन्होंने (सरकार) कहा था कि ‘सबका साथ, सबका विश्वास और सबका प्रयास’, लेकिन वे हिंदू-मुसलमान, मंदिर-मस्जिद और नफरत की राजनीति कर रही हैं। गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि जो पढ़ेगा, वही बढ़ेगा। उन्होंने (नितिन गडकरी) शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मुसलमानों को एपीजे अब्दुल कलाम या मौलाना आजाद बनने की दिशा में सोचना चाहिए। वे निडर हैं और भाजपा के भीतर असहज स्थिति पैदा कर देते हैं। नितिन गडकरी अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं।'

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को नागपुर में एक अल्पसंख्यक संस्थान के दीक्षांत समारोह में कहा कि मुस्लिम समाज को सबसे ज्यादा शिक्षा की जरूरत है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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