Suvendu Adhikari Tata Motors Bengal: पश्चिम बंगाल की सत्ता में हुए ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब सूबे की नई राजनीतिक और औद्योगिक दिशा तय होने लगी है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में एक ऐसा बड़ा राजनीतिक और आर्थिक दांव चला है, जो सीधे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सबसे बुनियादी एजेंडे पर चोट करता है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि राज्य की भाजपा सरकार टाटा समूह (Tata Group) को पश्चिम बंगाल में वापस लाएगी।
यह बयान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह टाटा मोटर्स की उसी नैनो कार परियोजना से जुड़ा है, जिसे लेकर 2006 से 2008 के बीच हुए हिंसक भूमि आंदोलन ने बंगाल की पूरी राजनीति को बदल कर रख दिया था।
क्यों टाटा को बंगाल छोड़ना पड़ा?
साल 2008 में हुगली जिले का सिंगूर देश के सबसे बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया था। तत्कालीन वाम मोर्चा (वामपंथियों) की सरकार ने टाटा की छोटी कार 'नैनो' के प्लांट के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। लेकिन ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी ने किसानों की सहमति के बिना 'जबरन भूमि अधिग्रहण' का आरोप लगाते हुए एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया।
लगातार बढ़ते विवाद, विरोध प्रदर्शन और असुरक्षा के माहौल के कारण अंततः टाटा समूह को पश्चिम बंगाल छोड़ना पड़ा और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर रतन टाटा इस प्रोजेक्ट को गुजरात के साणंद ले गए। इस सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन की लहर पर सवार होकर ही ममता बनर्जी ने 2011 में वामपंथियों के 34 साल पुराने किले को ढहाया था और सत्ता हासिल की थी। लेकिन इसके बाद बंगाल की छवि 'उद्योग-विरोधी' बन गई, जिससे राज्य में भारी निवेश आना बंद हो गया।
अब कैसे होगी टाटा की वापसी? शुभेंदु ने बताया नया फॉर्मूला
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली वामपंथी और टीएमसी सरकारों पर कड़ा निशाना साधते हुए कहा कि अब पुरानी गलतियों को दोहराए बिना राज्य में निवेश लाया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम पिछली वामपंथी सरकार की तरह किसानों की जमीन का जबरन अधिग्रहण नहीं करेंगे, जिसके कारण सिंगूर और नंदीग्राम जैसे दर्दनाक आंदोलन हुए। और न ही हम पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार की तरह उद्योग लाने के नाम पर सिर्फ झूठ बोलेंगे और केवल 'फोटो सेशन' करवाएंगे। हम उद्योगपतियों का विकास और किसानों के अधिकार, दोनों के बीच एक संतुलित नीति ला रहे हैं।'
शुभेंदु ने साफ किया कि उनकी सरकार एक नई 'भूमि अधिग्रहण नीति' की रूपरेखा तैयार कर रही है। इसमें जबरन जमीन लेने का कोई प्रावधान नहीं होगा, बल्कि जमीन के मालिकों और किसानों की पूर्ण सहमति और उन्हें उचित पार्टनरशिप या मुआवजा देकर ही औद्योगिक विकास को रफ्तार दी जाएगी।
