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नागरिकों को सरकार का गुलाम नहीं बनाया जा सकता है- मुंबई पुलिस को बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार

Bombay High Court: बंबई हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि नागरिकों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है और अगर कोई व्यक्ति सरकार का विरोध करता है, तो उसके खिलाफ मामले दर्ज किये जाते हैं।

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बम्बई उच्च न्यायालय (फाइल फोटो- bombayhighcourt)

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को एक जिला बदर के मामले में कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने याटिकाकर्ता के जिला बदर करने के आदेश को गलत ठहराते हुए पुलिस से कहा कि नागरिकों को सरकार का गुलाम नहीं बनाया जा सकता है। प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और आप उसे रोक नहीं सकते।

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता सईद अहमद अब्दुल वाहीद चौधरी ने अपने खिलाफ जारी जिला बदर आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।

चौधरी के खिलाफ भारत सरकार, भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन व आंदोलन करने तथा नारे लगाने को लेकर कई प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं, जिसके आधार पर उनके खिलाफ जिलाबदर का आदेश जारी किया गया था।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायमूर्ति माधव जामदार ने कहा कि केवल भारत सरकार के कुछ फैसलों का विरोध करने के कारण सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी को जिला बदर करना उनके मौलिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार को प्रभावित करता है। जिला बदर करने के आदेश को रद्द करते हुए, उच्च न्यायालय ने उल्लेख किया कि इसने चौधरी के मौलिक अधिकारों, वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने के उनके अधिकार को प्रभावित किया है। अदालत ने सवाल किया, ’’नारे लगाने पर जिलाबदर करने के आदेश क्यों जारी किये जाएं? क्या नागरिक ऐसे नारे नहीं लगा सकते? नागरिक सरकार की कार्रवाइयों और फैसलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते?’’

उच्च न्यायालय ने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर तंज

उच्च न्यायालय ने कहा कि नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है और अगर कोई व्यक्ति सरकार की कार्रवाइयों का विरोध करता है, आंदोलन करता है या उन पर सवाल उठाता है, तो उसके खिलाफ मामले दर्ज किये जाते हैं। न्यायमूर्ति जामदार ने हास्यपूर्ण अंदाज में कहा कि खुद को सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया का महासचिव बताने वाले चौधरी को राजनीतिक दल बदलने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि आजकल महाराष्ट्र में यही चलन दिखाई दे रहा है। न्यायमूर्ति जामदार ने मजाकिया अंदाज में कहा, ’’आप (चौधरी) को भी पाला बदल लेना चाहिए। वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में खरीद-फरोख्त हो रही है। आपके खिलाफ कुछ प्राथमिकी दर्ज हैं। पाला बदलने पर विचार कीजिए। एक वॉशिंग मशीन है।’’

पुलिस ने क्या कहा?

याचिका के अनुसार, चौधरी और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा सरकार के कुछ फैसलों के खिलाफ कई विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन किए जाने के बाद उनके खिलाफ जिला बदर का आदेश जारी किया गया था। पुलिस का दावा था कि ये विरोध-प्रदर्शन संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति लिए बिना आयोजित किए गए थे। अदालत ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों से कोई नुकसान हुआ था, इसलिए केवल इन्हीं के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के प्रावधानों के तहत जिला बदर करने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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