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चांद पर 'सो' गया रोवर, अब 20 दिन बाद फिर टूटेगी नींद, ISRO ने मिशन चंद्रयान-3 पर दिया ताजा अपडेट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 2, 2023, 11:13 PM IST

Chandrayaan-3 Mission update: इसरो ने एक ताजा ट्वीट में शनिवार को बताया है कि चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने अपना काम पूरा कर लिया है। अब इसे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सुरक्षित रूप से पार्क किया गया है और स्लीप मोड में सेट किया गया है।

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चंद्रयान-3 रोवर प्रज्ञान

Photo : Twitter

Chandrayaan-3 Mission update: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) ने अपने चंद्रयान-3 मिशन को लेकर ताजा अपडेट दिया है। इसरो ने एक ताजा ट्वीट में शनिवार को बताया है कि चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने अपना काम पूरा कर लिया है। अब इसे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सुरक्षित रूप से पार्क किया गया है और स्लीप मोड में सेट किया गया है।

इसरो ने आगे बताया कि रोवर प्रज्ञान में दोनों पेलोड APXS और LIBS अब बंद हैं। इन पेलोड से सारा डेटा लैंडर के जरिए पृथ्वी तक पहुंचा दिया गया है। इसरो ने कहा, रोवर प्रज्ञान की बैटरी पूरी तरह से चार्ज है।

22 सितंबर को फिर से जागेगा प्रज्ञान

रोवर को ऐसी दिशा में रखा गया है कि 22 सितंबर 2023 को जब चांद पर अगला सूर्योदय होगा तो सूर्य का प्रकाश इसके सौर पैनलों पर पड़े। इसके रिसीवर को भी चालू रखा गया है। इसरो ने उम्मीद जताई है कि 22 सितंबर को यह फिर से काम करना शुरू करेगा। इसरो ने कहा है कि अगर ऐसा नहीं होता है तो यह हमेशा भारत के चंद्र राजदूत के रूप में वहीं रहेगा।

14 दिन का था चंद्रयान- 3

बता दें, इसरो का चंद्रयान-3 मिशन 14 दिनों का ही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चंद्रमा पर 14 दिन की रात और 14 दिन का उजाला होता है। चंद्रयान-3 को जिस दक्षिणी ध्रुव पर लैंड कराया गया है, वहां पहले से ही सूर्य की कम रोशनी पहुंचती है और रोवर और लैंडर सूर्य की रोशनी में ही ऊर्जा प्राप्त करके काम कर सकते हैं। ऐसे मे रात होने पर उनकी पॉवर जनरेशन की प्रोसेस रुक जाएगी और चंद्रमा पर रात होती है तब तापमान -250 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है। ऐसे में चंद्रयान-3 के रोवल और लैंडर के ठंड के कारण उपकरण भी खराब हो सकते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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