देश

आगे बढ़ सकती है चंद्रयान-3 की लैंडिंग की तारीख, ISRO के वैज्ञानिक ने दिया बड़ा बयान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 21, 2023, 07:46 PM IST

Chandrayaan-3: इसरो के वैज्ञानिक नीलेश एम. देसाई ने कहा है कि 23 अगस्त को चंद्रयान-3 की लैंडिंग से 2 घंटे पहले हम लैंडर मॉड्यूल को कमांड देंगे और स्थितियों का आंकलन करेंगे। अगर हमें कुछ भी आपत्तिजनक लगता है तो हम चंद्रयान-3 की लैंडिंग को स्थगित कर देंगे और 27 अगस्त को लैंडर को चंद्रमा पर उतारेंगे।

Image

बढ़ सकती है चंद्रयान-3 की लैंडिंग की तारीख

Photo : Twitter

Chandrayaan-3: देश ही नहीं दुनिया चंद्रयान-3 की लैंडिंग का इंतजार कर रही है। 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रयान-3 चंद्रमा की सतह पर लैंड करेगा। इससे पहले इसरो के वैज्ञानिक ने बड़ा बयान दिया है। Space Applications Centre-ISRO के डायरेक्टर नीलेश एम. देसाई ने कहा है कि अगर 23 अगस्त स्थितियां अनुकूल नहीं हुई तो लैंडिंग की तारीख को आगे बढ़ाया जा सकता है।

न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए बयान के मुताबिक, नीलेश एम. देसाई ने कहा है कि 23 अगस्त को, चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर उतरने से दो घंटे पहले हम लैंडर मॉड्यूल की स्थिति और चंद्रमा पर स्थितियों का आंकलन करेंगे और उसी आधार पर निर्णय लेंगे।

आगे बढ़ सकती है लैंडिंग की तारीख

वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि अभी तक हमें चंद्रयान-3 की लैंडिंग में कोई परेशानी नहीं लग रही है। सब कुछ हमारे अनुरूप ही चल रहा है। 23 अगस्त को लैंडिंग से 2 घंटे पहले हम लैंडर मॉड्यूल को कमांड देंगे और स्थितियों का आंकलन करेंगे। उन्होंने कहा, अगर हमें कुछ भी आपत्तिजनक लगता है तो हम चंद्रयान-3 की लैंडिंग को स्थगित कर देंगे और 27 अगस्त को लैंडर को चंद्रमा पर उतारेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, कोई समस्या नहीं होनी चाहिए और हम 23 अगस्त को मॉड्यूल को चंद्रमा पर उतारने में सक्षम होंगे।

चंद्रयान-3 को मिला उसका दोस्त

चंद्रयान-3 ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से संपर्क स्थापित कर लिया है। ऑर्बिटर ने चंद्रयान-3 का स्वागत भी किया है। इसरो का कहना है कि इससे मिशन ऑपरेशंस कॉम्पलेक्स (MOX) को चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल तक पहुंचने में अन्य जरिया हासिल को गया है। बता दें, अगर चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करने में कामयाब हो जाता है तो भारत ऐसा करने वाला पहला देश हो जाएगा। वहीं चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने वाला चौथा देश बन जाएगा। दरअसल, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अभी तक कोई देश लैंडिंग नहीं करा पाया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें