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ग्रेट निकोबार परियोजना के विरोध में दायर जनहित याचिकाओं के खिलाफ केंद्र की याचिका खारिज

मामले में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने भी कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित एनजीटी की कार्यवाही में दो दौर की सुनवाई हो चुकी है।

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प्रतीकात्मक फोटो

उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका पर सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया, जिसमें 'ग्रेट निकोबार द्वीप मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट'के लिए सहमति लेने में वन अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली जनहित याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना गया था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला पहले से ही उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है और 25 तथा 26 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

'यह मुद्दा ’बहुत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय महत्व’ का है'

पीठ ने उच्च न्यायालय से कहा कि वह तय तारीख पर सभी लंबित याचिकाओं समेत मामले की सुनवाई करे। शुरुआत में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा कि यह मुद्दा ’बहुत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय महत्व’ का है। उन्होंने सवाल उठाया था कि इस मुद्दे से संबंधित जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।उन्होंने कहा कि परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी को पहले ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में चुनौती दी जा चुकी है। उन्होंने बाद में कई कार्यवाहियां शुरू किए जाने पर चिंता जताई।

वेंकटरमणि ने कहा, 'कोई व्यक्ति वर्षों बाद आता है और याचिका दायर करता है, फिर तीन अलग-अलग याचिकाएं तीन अलग-अलग तरीकों से इसे चुनौती देने की कोशिश करती हैं। फिर वे कहते हैं कि आदिवासी प्रभावित हैं और वे अदालत के समक्ष नहीं हैं। अब उन्होंने उन आदिवासी समूहों को भी पक्षकार बना लिया है।'उन्होंने कहा कि याचिका के सुनवाई योग्य होने का सवाल मामले की जड़ तक जाता है और अदालत से अनुरोध किया कि वह केंद्र को इस मुद्दे पर आगे दलीलें रखने की अनुमति दे।उन्होंने कहा, 'मैं केवल दरवाजा खुला रखना चाहता हूं, और कुछ नहीं। कम से कम हमें कुछ कहने की अनुमति दीजिए।'

संबंधित एनजीटी की कार्यवाही में दो दौर की सुनवाई हो चुकी है

मामले में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने भी कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित एनजीटी की कार्यवाही में दो दौर की सुनवाई हो चुकी है।इस मामले में पक्षकार बनाए गए एक आदिवासी परिषद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने कहा कि यह मुद्दा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों से संबंधित है और इसलिए जनहित याचिका सुनवाई योग्य है।

न्यायमूर्ति बागची ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि चूंकि याचिका की विचारणीयता पर पहले ही फैसला हो चुका है, इसलिए इसमें निहित जनहित याचिका के दायरे से जुड़े सवालों को खुला रखा जा सकता है।हालांकि, मुरलीधर ने कहा कि जनहित किस हद तक कायम है, यह सवाल ही शायद अकादमिक हो सकता है, क्योंकि आदिवासी परिषद ने पक्षकार बनाए जाने के लिए आवेदन दायर किया है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि व्यापक सवाल मूल निवासी समुदायों की पहचान और संस्कृति के संवैधानिक संरक्षण से संबंधित है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शीर्ष अदालत कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने का अनुरोध करेगी।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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