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किसानों की शिकायतों पर केंद्र सरकार सख्त- शिवराज सिंह बोले, संतुष्टि तक बंद न हों केस

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतों के समाधान को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि जब तक किसान पूरी तरह संतुष्ट न हों, शिकायत बंद न की जाए, साथ ही धीमे राज्यों पर कार्रवाई और बेहतर काम करने वालों को सम्मानित करने की बात कही।

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अधिकारों के साथ बैठक करते केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

किसानों की शिकायतों के समाधान को लेकर केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन में उच्चस्तरीय बैठक कर पूरे सिस्टम की समीक्षा की। बैठक में उर्वरक, बीज, कीटनाशक, पीएम फसल बीमा योजना और पीएम किसान पोर्टल पर दर्ज हो रही शिकायतों की बारीकी से समीक्षा की गई।

बैठक में मंत्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी सभी शिकायतों के लिए एक ही एकीकृत प्लेटफॉर्म होना चाहिए, ताकि किसानों को बार-बार अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना न पड़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “जब तक शिकायतकर्ता किसान पूरी तरह से संतुष्ट न हो, तब तक शिकायत को बंद न किया जाए।” साथ ही हर केस में किसान से फोन कॉल के जरिए फीडबैक लेने की बात कही, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समाधान से किसान वाकई खुश हैं या नहीं।

कीटनाशक से जुड़ी 150 शिकायतों में से 120 मामलों में कार्रवाई

बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि अब तक कीटनाशक से जुड़ी 150 शिकायतों में से 120 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 11 नकली कीटनाशक मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है और 8 कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। इसके अलावा, 24 किसानों को मुआवजा भी दिलाया गया है।

शिवराज सिंह चौहान ने उन राज्यों पर भी सख्ती दिखाई जहां शिकायतों के समाधान में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि “जिन राज्यों में कार्रवाई धीमी और शिकायतें ज्यादा हैं, उन्हें चिन्हित किया जाएगा।” मंत्री ने कहा कि जल्द ही उन राज्यों को अगली बैठक में बुलाकर उनसे जवाब तलब किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि किसानों की शिकायतों का बेहतर और समयबद्ध निपटारा करने वाले राज्यों और अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जो अच्छा काम करेगा, उसे सराहा जाएगा ताकि बाकी राज्यों को भी प्रेरणा मिले।”

बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि राज्यों के नोडल अधिकारी रोजाना कम से कम 10 किसानों से सीधा संवाद करेंगे और उनकी संतुष्टि का स्तर दर्ज करेंगे। मंत्री चौहान ने कहा कि “अगर शिकायत गंभीर है तो मंत्रालय खुद हस्तक्षेप करेगा।”

कुल मिलाकर, सरकार का मकसद साफ है। किसानों की बात सुनी जाए, समझी जाए और पूरी ईमानदारी से सुलझाई जाए।

Prerit Kumar
प्रेरित कुमारauthor

मैं एक जिज्ञासु पत्रकार हूँ, जो खबरों के हर पहलू को निष्पक्षता के साथ पाठकों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य का अनुभव रखता हूँ। पत्रकारिता की दुनिया में एक दशक से सक्रिय हूँ। समाज और सच्चाई को जोड़ने वाली सार्थक पत्रकारिता में विश्वास करता हूँ।

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