देश

CEC ज्ञानेश कुमार का मेरठ-वाराणसी दौरा स्थगित, उठे सवाल तो चुनाव आयोग ने दी सफाई

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मेरठ और वाराणसी के प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन्हें अचानक स्थगित नहीं किया गया। आयोग के मुताबिक, दोनों ELC सम्मेलनों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही लिया गया था।

Image

CEC ज्ञानेश कुमार का मेरठ-वाराणसी दौरा टला।

Photo : PTI

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के मेरठ और वाराणसी दौरे के स्थगित होने को लेकर चुनाव आयोग ने सफाई दी है। आयोग के मुताबिक, इन दोनों कार्यक्रमों को अचानक स्थगित नहीं किया गया है। दोनों क्षेत्रीय ईएलसी सम्मेलनों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही लिया गया था और इसका आधिकारिक कम्युनिकेशन भी उसी दिन किया गया था।

दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मेरठ दौरा 25 सितंबर को प्रस्तावित था। वहीं 28 सितंबर को वाराणसी में कार्यक्रम होना था। इन कार्यक्रमों में युवाओं से संवाद के साथ-साथ चुनावी साक्षरता से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होना था।

तारीखों में बदलाव सामान्य प्रक्रिया- चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने कहा है कि कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव किया जाता है। इनमें कार्यक्रम स्थल की उपलब्धता, वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम और प्राकृतिक परिस्थितियां जैसे कारण शामिल हो सकते हैं।

आयोग ने कहा कि पहले भी कई मौकों पर ईएलसी सम्मेलनों की तारीखों में बदलाव या उन्हें स्थगित किया गया है। इसके उदाहरण के तौर पर हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड का जिक्र किया गया है। आयोग के मुताबिक, यूपी के इन दो सम्मेलनों को स्थगित करने का फैसला भी 21 सितंबर को ही लिया गया था।

हिमाचल, उत्तराखंड और लद्दाख में भी बदले गए थे कार्यक्रम

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में पर्यटक सीजन और परीक्षाओं के चलते प्रस्तावित कार्यक्रम में बदलाव किया गया था। उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं, लद्दाख का कार्यक्रम मानसरोवर क्षेत्र में आई आपदा के चलते टालना पड़ा था। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त की भूटान यात्रा के कारण भी कुछ कार्यक्रमों के शेड्यूल में बदलाव किया गया था।

आयोग के सूत्रों के मुताबिक, ऐसे कार्यक्रमों में करीब 1,000 तक युवा शामिल हो सकते हैं। इसलिए स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और कार्यक्रम स्थल की उपलब्धता के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त की अन्य आधिकारिक यात्राओं को देखते हुए तारीखों में बदलाव किया जाता है। चुनाव आयोग का कहना है कि ईएलसी सम्मेलनों की तारीखों में समायोजन को असामान्य घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग प्रशासनिक और स्थानीय कारणों से पहले भी ऐसे बदलाव होते रहे हैं।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

और पढ़ें
End of Article