Cabinet Committee on Security: पश्चिमी एशिया में पैदा हो रहे हालात की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कल रात कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक हुई। CCS को 28 फरवरी को ईरान पर हुए हवाई हमलों और उसके बाद खाड़ी देशों में हुए हमलों सहित बढ़ते तनाव के बारे में जानकारी दी गई। कैबिनेट समिति ने क्षेत्र में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के बड़े समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई।
सीसीएस ने क्षेत्र से होकर गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों को हो रही कठिनाइयों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों की भी समीक्षा की। सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को इन घटनाक्रमों से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक और व्यवहार्य उपाय करने का निर्देश दिया। इसने शत्रुता की जल्द समाप्ति और संवाद व कूटनीति की ओर लौटने के महत्व पर बल दिया।
भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा पर चिंता
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि सीसीएस की बैठक में पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति की समीक्षा की गई और 18 फरवरी को ईरान पर हुए हवाई हमलों और उसके बाद खाड़ी देशों में हुए हमलों सहित बढ़ते तनाव के बारे में जानकारी दी गई। बयान में कहा गया, इसने क्षेत्र में रहने वाले बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
सीसीएस की बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी उपस्थित थे।
ईरान में लगभग 10 हजार भारतीय नागरिक
ईरान में लगभग 10 हजार भारतीय नागरिक रहते, पढ़ते या काम करते हैं। वहीं अगर बात इजरायल की करें तो वहां 40 हजार से अधिक भारतीय हैं, जबकि खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में कुल मिलाकर करीब 90 लाख भारतीय बसे हुए हैं। ऐसे में स्थिति और बिगड़ने की आशंका को देखते हुए निकासी योजना पर भी चर्चा संभव है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में मौजूद भारतीय मिशन लगातार नागरिकों के संपर्क में हैं और हेल्पलाइन सक्रिय कर दी गई हैं।
