Chandra Nath Rath Murder: पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच CBI करेगी। सुवेंदु सरकार ने इस संबंध में सीबीाई जांच की सिफारिश कर दी है। चुनावी मतगणना के दिन 4 मई को चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस लगातार जांच में जुटी है कुछ संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। कल तीन आरोपियों को यूपी से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया था जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं, टीएमसी ने चंद्रनाथ रथ की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की थी। पार्टी ने इस हत्याकांड में पार्टी की किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
CBI आज पश्चिम बंगाल पुलिस से जांच अपने हाथ में लेगी, DIG रैंक के अधिकारी टीम को लीड करेंगे। इससे पहले, बंगाल पुलिस ने इस मामले में CBI जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई एसआईटी सदस्यों की टीम कुछ ऐसी है।
- पंकज सिंह - डीआईजी सीबीआई दिल्ली
- सुभाष चन्द्र कुंडू, सीबीआई दिल्ली एसपी
- अनिल कुमार यादव, एसपी, सीबीआई दिल्ली
- विकास पाठक, डीएसपी धनबाद, सीबीआई
- अमित कुमार, डीएसपी सीबीआई पटना
- कुलदीप, डीएसपी सीबीआई एसीबी, रांची
- विवेक श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर एसीबी लखनऊ
सीबीआई की ये एसआईटी टीम ज्वाइंट डायरेक्टर कोलकता के सुपरविजन में काम करेगी इसमे कोलकता सीबीआई अफसर भी शामिल होंगे।
चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। सोमवार 11 मई को बंगाल पुलिस की एक विशेष टीम (SIT) ने उत्तर प्रदेश में दबिश देकर तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। चन्द्रनाथ रथ हत्याकांड में शामिल तीनो अपराधियों को बंगाल में अदालत में पेश किया जहां जहां उन्हें 13 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया।
साजिश का पर्दाफाश होने की उम्मीद
इन तीनों से फिलहाल पूछताछ की जा रही है, जिससे इस हत्याकांड की पूरी साजिश का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। इसमें एक संदिग्ध का नाम राज सिंह है, जो बलिया का निवासी बताया जा रहा है, ये बक्सर में रह रहा था। वारदात के बाद वह अयोध्या में छुपा हुआ था। कोलकाता पुलिस और अयोध्या पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में राज सिंह को पकड़ा गया और बाद में उसे कोलकाता ले जाया गया। राज के अलावा आरोपी मयंक मिश्रा और विक्की मौर्या को भी पुलिस बारासात कोर्ट लेकर पहुंची थी।
UPI पेमेंट बना सुराग
इस पेशेवर हत्या की जांच में पुलिस के हाथ सबसे महत्वपूर्ण सुराग 'UPI पेमेंट' के जरिए लगा है। जांच में खुलासा हुआ है कि हत्या को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की गई कार जब हावड़ा के बाली टोल प्लाजा से गुजरी, तो वहां मौजूद संदिग्धों ने नकद या फास्टैग के बजाय UPI के माध्यम से टोल का भुगतान किया था। इस एक डिजिटल फुटप्रिंट ने पुलिस को हत्यारों के मोबाइल नंबर और उनके बैंक विवरण तक पहुंचा दिया, जो अंततः उन्हें उत्तर प्रदेश और झारखंड के ठिकानों तक ले गया।
CCTV में कैद हुई सिल्वर कार
हावड़ा के बाली टोल प्लाजा पर लगे CCTV फुटेज की जांच में हत्या से कुछ घंटे पहले एक सिल्वर कलर की हैचबैक कार (निसान माइक्रा) गुजरती हुई दिखाई दी थी। इस कार में तीन संदिग्ध सवार थे, जिनकी पहचान अब तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। यही वह कार है जिसका इस्तेमाल मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ की स्कॉर्पियो को रोकने के लिए किया गया था। पुलिस ने हत्याकांड में इस्तेमाल की गई सिल्वर कार को दोहरिया इलाके से बरामद कर लिया है। कातिलों ने वारदात के बाद इस कार को वहीं छोड़ दिया था और दूसरी गाड़ी या बाइक से फरार हो गए थे। इसके साथ ही, पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त मोटरसाइकिल को भी जब्त कर लिया है। जांच में पाया गया कि इन वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी और उनके चेसिस नंबर भी मिटाने की कोशिश की गई थी ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।
