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Unnao Rape Case: कुलदीप सेंगर को मिली जमानत तो सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI, दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दिल्ली हाई कोर्ट के सामने CBI ने सेंगर की याचिका का जोरदार विरोध किया था और अपराध की गंभीरता को बताते हुए चेतावनी दी थी कि अगर उसकी सजा निलंबित की गई तो संभावित खतरे हो सकते हैं।

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कुलदीप सेंगर को मिली जमानत तो सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI

Unnao Rape Case Update: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने 2017 के उन्नाव रेप केस में बीजेपी से निकाले गए नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जांच एजेंसी ने संविधान के आर्टिकल 136 के तहत एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है, जिसमें 23 दिसंबर के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें सेंगर को सशर्त जमानत दी गई थी, जबकि उसकी अपील अभी पेंडिंग है। इससे पहले, CBI और पीड़िता के परिवार दोनों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का इरादा जताया था।

दिल्ली हाई कोर्ट के सामने CBI ने सेंगर की याचिका का जोरदार विरोध किया था और अपराध की गंभीरता को बताते हुए चेतावनी दी थी कि अगर उसकी सजा निलंबित की गई तो संभावित खतरे हो सकते हैं।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने सेंगर की अर्जी मंजूर कर ली थी और अपील लंबित रहने तक कुछ कड़ी शर्तों के साथ उनकी उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर दिया था। हालांकि, रेप केस में जमानत मिलने के बावजूद, सेंगर के तुरंत रिहा होने की उम्मीद नहीं है क्योंकि वह पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े मामलों में अलग सजा काट रहा है।

उन्नाव रेप केस

उन्नाव रेप केस ने पूरे देश में गुस्सा भड़का दिया था। दिसंबर 2019 में, एक ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को एक नाबालिग लड़की को किडनैप करने और रेप करने का दोषी ठहराया और उसे जिंदगी भर जेल की सजा के साथ-साथ ₹25 लाख का जुर्माना भी लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सभी संबंधित मामलों को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था और रोजाना सुनवाई का आदेश दिया था।

इस बीच, पीड़िता के परिवार ने महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर सेंगर की सजा पर रोक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और तख्तियां पकड़ीं, जिसमें कहा गया कि जमानत के आदेश ने लोगों का भरोसा तोड़ दिया है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के बारे में एक परेशान करने वाला संदेश दिया है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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