क्या है पूरा मामला?
मामले में, 13 अगस्त 2008 को उच्च न्यायालय की एक अन्य कार्यरत न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर के आवास पर कथित रूप से 15 लाख रुपये से भरा एक पैकेट गलत तरीके से पहुंचा दिया गया था। आरोप लगाया गया था कि यह नकदी न्यायमूर्ति निर्मल यादव को एक संपत्ति सौदे को प्रभावित करने के लिए रिश्वत के रूप में दी जानी थी।
CBI ने क्या कुछ कहा?
सीबीआई की विशेष न्यायाधीश अलका मलिक की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। बचाव पक्ष के वकील विशाल गर्ग ने बताया कि अदालत ने पूर्व न्यायाधीश निर्मल यादव और चार अन्य को बरी कर दिया है। मामले में कुल पांच आरोपी थे, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।अदालत ने बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति यादव के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में अंतिम दलीलें सुनी थीं और फैसला सुनाने के लिए 29 मार्च की तारीख तय की थी।
इस मामले में हरियाणा के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता संजीव बंसल, दिल्ली के होटल व्यवसायी रविंदर सिंह, व्यवसायी राजीव गुप्ता और एक अन्य व्यक्ति का नाम भी सामने आया था। आरोपियों में से एक संजीव बंसल की फरवरी 2017 में बीमारी से मौत हो गई थी। मामले की सूचना चंडीगढ़ पुलिस को दी गई, जिसके बाद इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। हालांकि, बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।
यह फैसला 14 मार्च को आग लगने की घटना के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के लुटियंस आवास में ''नोटों से भरी चार से पांच अधजली बोरियां'' मिलने को लेकर उठे विवाद के बीच आया है।
