Mark Carney Delhi Visit: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपनी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी के साथ दिल्ली पहुंचे। प्रधानमंत्री कार्नी 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह भारत का उनका पहला आधिकारिक दौरा है। इससे पहले, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को जानकारी दी कि उनका देश भारत के साथ एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर चर्चा कर रहा है।
कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद का स्वागत
इस समझौते का लक्ष्य वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। ‘कनाडा-भारत फोरम’ में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तक इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। इसी के साथ, भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ट्वीट कर कहा, "आज शाम नई दिल्ली में कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद का स्वागत किया। कल प्रधानमंत्री स्तर की बैठक की प्रतीक्षा है।"
प्रधानमंत्री कार्नी ने क्या कहा?
चार दिवसीय भारत यात्रा पर आए प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा, “यह हमारे दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो हमें नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। हमें बड़े लक्ष्य निर्धारित करने होंगे और उसी दिशा में आगे बढ़ना होगा। पिछले वर्ष मेरे चुनाव के तुरंत बाद हमारी सरकार ने भारत के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करने की पहल शुरू की थी।” कार्नी ने आगे बताया, “मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कनाडा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया था। उनके आगमन के बाद हमने सुरक्षा, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्रों में वार्ता को पुनः शुरू करने पर सहमति बनाई। इसके बाद जोहानिसबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और मैंने ऑस्ट्रेलिया के साथ महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीक के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक साझेदारी की शुरुआत की।”
ईरान पर किए गए हमलों का समर्थन
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और वैश्विक शांति व सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि कनाडा इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है। मुंबई में आयोजित कनाडा-भारत फोरम को संबोधित करते हुए कार्नी ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य ईरान पश्चिम एशिया में अस्थिरता और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला प्रमुख कारक रहा है। उन्होंने ईरान के मानवाधिकार रिकॉर्ड की आलोचना करते हुए इसे दुनिया में सबसे खराब में से एक बताया और स्पष्ट किया कि उसे किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने या प्राप्त करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। कार्नी ने कहा कि कनाडा और उसके वैश्विक सहयोगी लगातार ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि कनानास्किस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन और पिछले वर्ष सितंबर में संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधों की पुनर्बहाली जैसे कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं। साथ ही, कनाडा ने 250 से अधिक ईरानी संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाए हैं।
(इनपुट - भाषा)
