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24 घंटे में भी नहीं ठीक हुआ जस्टिन ट्रूडो का विमान, जानिए क्या है कनाडा वापसी का बैकअप प्लान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 11, 2023, 09:01 PM IST

Justin Trudeau aircraft: कनाडाई पीएम के विमान में आई खराबी 24 घंटे बाद भी दूर न होने पर कनाडा से दूसरे विमान को बुलाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिन ट्रूडो और उनके प्रतिनिधिमंडल को भारत से वापस लाने के लिए विमान CFC002 भारत के लिए रवाना हो चुका है।

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विमान में तकनीकी खराबी के बाद जस्टिन ट्रूडो भारत में फंसे

Photo : BCCL

Justin Trudeau aircraft: जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को रविवार को वापस अपने मुल्क रवाना होना था। लेकिन उनके विमान में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे उन्हें भारत में ही रकना पड़ गया। खास बात यह है कि ट्रूडो के विमान को खराब हुए 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन तकनीकी खराबी दूर नहीं हुई है। ऐसे में प्रधानमंत्री ट्रूडो और उनके साथ आया प्रतिनिधिमंडल अब तक भारत में ही है।

अब सामने आया है कि कनाडा ने अपने प्रधानमंत्री और प्रतिनिधि मंडल को लाने के लिए बैकअप विमान भेजा है। आजतक की एक रिपोर्ट में कनाडाई अखबार के हवाले से लिखा गया है कि बैकअप विमान कनाडा से नई दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है।

कनाडाई सशस्त्र बलों ने रोक दिया विमान

दरअसल, ट्रूडो रविवार रात को कनाडा के लिए प्रस्थान करने वाले थे। उड़ान से पूर्व जब उनके विमान की जांच की गई तो उसमें तकनीकी खराबी सामने आई। इसके बाद कनाडाई सशस्त्र बलों ने विमान CFC001 को उड़ान भरने से रोक दिया। कनाडा के राष्ट्रीय रक्षा विमाग का कहना है कि विमान के कंपोनेंट में मेंटेनेंस प्रॉब्लम आ रही है, जिसे बदलना जरूरी है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि उड़ान से पूर्व विमान की सुरक्षा जांच प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल का हिस्सा है।

ये है कनाडा का बैकअप प्लान

कनाडाई पीएम के विमान में आई खराबी 24 घंटे बाद भी दूर न होने पर कनाडा से दूसरे विमान को बुलाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिन ट्रूडो और उनके प्रतिनिधिमंडल को भारत से वापस लाने के लिए विमान CFC002 भारत के लिए रवाना हो चुका है। सोमवार तड़के यह विमान इंग्लैंड में रुका, फिलहाल एयरबस CFC002 भारत के रास्ते में हैं। पीएम ट्रूडो के प्रेस सचिव मोहम्मद हुसैन का कहना है कि हम कल सुबह प्रस्थान के लिए काम कर रहे हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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