अधिकारियों के मुताबिक, एससू-30 एमकेआई विमानों के लिए एयरो इंजनों की डिलीवरी एक वर्ष के बाद शुरू हो जाएगी और आठ वर्ष की अवधि में पूरी हो जाएगी। बता दें, एसयू-30एमकेआई भारतीय वायुसेना के सबसे शक्तिशाली और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों के बेड़े में से एक है।
54% स्वदेशी होंगे एयरो इंजन
एससू-30 एमकेआई विमानों के एयरो इंजन में 54% से अधिक स्वदेशी सामग्री प्रयोग होगी, ऐसा एयरो-इंजन के कुछ प्रमुख घटकों के स्वदेशीकरण के कारण ही संभव हो सका है। इनका विनिर्माण एचएएल के कोरापुट प्रभाग में किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया एचएएल द्वारा इन एयरो-इंजनों की आपूर्ति से भारतीय वायुसेना की निर्वाह आवश्यकता पूरी हो जाएगी ताकि वे अपने निर्बाध संचालन को जारी रख सकें और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत कर सकें।
