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'...किसी से भी शादी कर सकते हैं बसपा कार्यकर्ता', मायावती ने आखिर क्यों कह दी ये बात?

Mayawati on Marriage Controversy: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों शादी को लेकर उठापटक का दौर जारी है। बसपा से जुड़ा एक विवाद सामने आया, जिसमें दूसरी पार्टी से जुड़े शख्स से शादी करने को लेकर एक्शन की बात कही गई। अब इस मामसले में खुद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सफाई दी है और कहा है कि बसपा कार्यकर्ता लाइन से हटकर किसी से भी शादी कर सकते हैं।

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मायावती और अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

UP Politics: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने उन खबरों का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि एक नेता को पार्टी से इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि उन्होंने अपने बेटे की शादी समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक की बेटी से कर दी। उन्होंने कहा कि बसपा कार्यकर्ता पार्टी लाइन से हटकर किसी से भी शादी करने के लिए स्वतंत्र हैं। बसपा की रामपुर इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सागर के बेटे की हाल ही में आंबेडकर नगर जिले के अलापुर से सपा विधायक त्रिभुवन दत्त की बेटी के साथ शादी हुई। इससे पहले दत्त बसपा में थे, लेकिन 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा में शामिल हो गए।

बसपा सुप्रीमो ने बताया, क्यों पार्टी से निकाला?

मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि सागर और रामपुर में बसपा के मौजूदा जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार को उनके बीच जारी विवाद के कारण पार्टी से निष्कासित किया गया था और इसका शादी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, 'रामपुर जिले की इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र सागर और मौजूदा जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार का आपसी झगड़ा चरम पर था, जिससे पार्टी के कार्य प्रभावित हो रहे थे। इसीलिए दोनों को एक साथ निकाला गया। इसका शादी से कोई संबंध नहीं है।'

रिश्ता जोड़ने को लेकर क्या बोलीं मायावती?

मायावती ने कहा, 'कौन किस पार्टी के लोगों के साथ अपना रिश्ता बना रहा है इसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। लोग स्वतंत्र हैं जहां चाहें वहां रिश्ता करें। यह सब उनकी सोच पर निर्भर करता है, लेकिन ऐसे लोगों से जरूर सर्तक रहें जो इसका भी गलत प्रचार कर रहे हैं।' एक अन्य पोस्ट में मायावती ने कहा कि पार्टी सदस्यों को बसपा के पूर्व सांसद मुनकाद अली के बेटे की शादी में शामिल होने से इसलिए रोका गया क्योंकि उनकी बेटी ने सपा के टिकट पर मीरापुर से राज्य विधानसभा उपचुनाव लड़ा था।

पूर्व सांसद के बेटे शाह मोहम्मद से हुई शादी

मीरापुर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी सुम्बुल राणा की शादी पूर्व सांसद कादिर राणा के बेटे शाह मोहम्मद से हुई है। मायावती ने कहा, 'बसपा ने भी इस सीट पर चुनाव लड़ा था। ऐसे में शादी में दोनों दलों के लोगों के बीच टकराव की आशंका को लेकर चर्चा आम थी। इससे बचने के लिए पार्टी को यह कदम उठाना पड़ा, लेकिन जिस तरह से इसका प्रचार किया जा रहा है, वह ठीक नहीं है।'

मुजफ्फरनगर जिले की मीरापुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल की मिथलेश पाल ने जीत दर्ज की। पाल को 84,304 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राणा को 30,796 मतों के अंतर से हराया। बसपा उम्मीदवार 3,248 वोट पाकर पांचवें स्थान पर रहीं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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