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त्रिपुरा में BSF की बड़ी कार्रवाई, 26 जनवरी से अब तक 14 बांग्लादेशियों को पकड़ा

Action against Bangladeshi: त्रिपुरा में बीएसएफ ने 26 जनवरी से अब तक 14 बांग्लादेशियों को पकड़ा। सहयोगी एजेंसियों के साथ विभिन्न संयुक्त अभियानों में, बीएसएफ के जवानों ने दूरदराज के इलाकों में गांजा खेती को नष्ट करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। आपको इससे जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

BSF Arrested 14 Bangladeshi: त्रिपुरा में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने 26 जनवरी से अब तक भारत में घुसपैठ की कोशिश करते 14 बांग्लादेशियों को पकड़ा है। बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। इसी अवधि के दौरान घुसपैठ में मदद करने वाले दो भारतीय दलालों को भी पकड़ा गया है।

बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर ने बढ़ा दी है सतर्कता

इसके अलावा, बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ, चीनी, मवेशी और तस्करी कर लाई गई अन्य चीजें जब्त की है जिनकी कुल कीमत 2.5 करोड़ रुपये है। अधिकारी ने कहा, ‘‘बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर ने सतर्कता बढ़ा दी है और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गश्त को मजबूत किया है। 26 जनवरी 2025 से अब तक बीएसएफ के जवानों ने घुसपैठ और सीमा पार से तस्करी के कई प्रयासों को नाकाम किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न अभियानों में 14 बांग्लादेशी नागरिकों और दो भारतीय दलालों को बीएसएफ ने पकड़ा। इसके अलावा, बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ, चीनी, मवेशी और तस्करी कर लाई गई अन्य चीजें जब्त की गई जिनकी कुल कीमत 2.5 करोड़ रुपये है।’’

गश्त और सीमा समन्वय को लेकर की गईं कई बैठकें

उन्होंने कहा कि बीएसएफ, बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) के साथ मजबूत समन्वय बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान विभिन्न स्तरों पर लगभग 80 समन्वित गश्त और सीमा समन्वय को लेकर कई बैठकें की गईं। उन्होंने कहा, ‘‘सहयोगी एजेंसियों के साथ विभिन्न संयुक्त अभियानों में, बीएसएफ के जवानों ने दूरदराज के इलाकों में गांजा खेती को नष्ट करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। इसी अवधि के दौरान लगभग 60 एकड़ भूमि पर गांजे की अवैध खेती को नष्ट किया गया जिसकी एक लाख रुपये थी।’’

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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