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'BJP प्रचार के लिए भेजेगी तो जाऊंगा...' विनेश और बजरंग पुनिया पर बोले बृजभूषण सिंह, कहा-एक दिन कांग्रेस को पछताना पड़ेगा

Brij Bhushan Sharan Singh: भाजपा के पूर्व सांसद और कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, मैं बेटियों का अपमान करने का दोषी नहीं हूं। अगर कोई बेटियों का अपमान करने का दोषी है, तो वह बजरंग और विनेश हैं और जिसने इसकी पटकथा लिखी, भूपेंद्र हुड्डा इसके लिए जिम्मेदार हैं।

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बृजभूषण सिंह।

Photo : ANI

Brij Bhushan Sharan Singh: विनेश फोगाट के कांग्रेस में शामिल होते ही सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस ने महिला रेसलर को हरियाणा की जुलाना विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है। इस पर भाजपा के पूर्व सांसद और कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, एक दिन इस फैसले के लिए कांग्रेस को पछताना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के पास कई नेता हैं, लेकिन अगर उन्हें विनेश के खिलाफ प्रचार करने के लिए भेजा जाएगा तो वह जरूर जाएंगे। बृजभूषण सिंह ने दावा किया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में कोई भी भाजपा उम्मीदवार विनेश को हरा देगा।

बृजभूषण सिंह ने इस दौरान कांग्रेस पार्टी पर भी जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा, जंतर-मंतर पर जो आंदोलन हुआ, वो खिलाड़ियों का अंदोलन नहीं था बल्कि कांग्रेस का आंदोलन था। अब यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस ने हमारे खिलाफ षड़यंत्र रचा था। उन्होंने कहा, बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट ने लड़कियों के सम्मान के लिए आंदोलन नहीं किया था, बल्कि रजानीति के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया गया था।

मैं बेटियों के अपमान का दोषी नहीं

भाजपा नेता ने कहा, मैं बेटियों का अपमान करने का दोषी नहीं हूं। अगर कोई बेटियों का अपमान करने का दोषी है, तो वह बजरंग और विनेश हैं और जिसने इसकी पटकथा लिखी, भूपेंद्र हुड्डा इसके लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, एक दिन कांग्रेस को इसके लिए पछताना पड़ेगा। इससे पहले उन्होंने कहा था कि पहलवानों को न्याय दिलाने के नाम पर बहुत से कांग्रेस नेता उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ था। एक के बाद एक कई पहलवानों को अपना मोहरा बनाया गया।

विनेश को भगवान ने सजा दी

बृजभूशण शरण सिंह ने कहा, हरियाणा खेल के क्षेत्र में भारत का सिरमौर है और जिस तरह उन्होंने कुश्ती की गतिविधियों को लगभग 2.5 साल तक रोक दिया। क्या यह सच नहीं है कि बजरंग एशियाई खेलों में बिना ट्रायल के चले गए? मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूं जो कुश्ती के विशेषज्ञ हैं। मैं विनेश फोगट से पूछना चाहता हूं कि क्या कोई खिलाड़ी एक दिन में 2 भार श्रेणियों में ट्रायल दे सकता है? क्या वजन के बाद 5 घंटे के लिए ट्रायल रोके जा सकते हैं?... आप कुश्ती नहीं जीते, आप धोखाधड़ी करके वहां गए थे। भगवान ने आपको उसी की सजा दी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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