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Bomb Threats: करीब 20 से अधिक विमानों को बम से उड़ाने की मिली धमकी, जानें फिर क्या हुआ

Flight Bomb Threats: एक तरफ दिल्ली के रोहिणी में सीआरपीएफ स्कूल के पास बम धमाके से हर कोई सहमा हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर भारतीय विमानों को बम से उड़ाने के धमकी मिली है। सूत्रों ने बताया है कि रविवार को करीब 20 उड़ानों में बम होने की धमकी मिली है। आपको तफसील से सबकुछ समझाते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

Delhi: भारतीय विमानन कंपनियों के 20 से अधिक विमानों को रविवार को बम से उड़ाने की धमकी मिली। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि इन विमानन कपंनियों में इंडिगो, विस्तारा, एयर इंडिया और अकासा एयर शामिल हैं जिनकी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों सहित विभिन्न उड़ानों में बम होने की धमकी मिली।

इन कंपनियों की छह-छह विमानों को उड़ाने की धमकी

उन्होंने बताया कि इंडिगो, विस्तारा और एयर इंडिया की छह-छह उड़ानों को धमकियां मिलीं। इंडिगो के प्रवक्ता ने एक अलग बयान में कहा कि एयरलाइन ने उड़ान संख्या 6ई 58 (जेद्दा से मुंबई), 6ई87 (कोझिकोड से दम्माम), 6ई11 (दिल्ली से इस्तांबुल), 6ई17 (मुंबई से इस्तांबुल), 6ई133 (पुणे से जोधपुर) और 6ई112 (गोवा से अहमदाबाद) में उत्पन्न स्थिति पर ध्यान दिया।

विस्तारा ने कहा कि उसे छह उड़ानों यूके25 (दिल्ली से फ्रैंकफर्ट), यूके106 (सिंगापुर से मुंबई), यूके146 (बाली से दिल्ली), यूके116 (सिंगापुर से दिल्ली), यूके110 (सिंगापुर से पुणे) और यूके107 (मुंबई से सिंगापुर) को लेकर धमकी मिली है। विस्तारा के प्रवक्ता ने बताया, ‘‘प्रोटोकॉल के अनुरूप, सभी संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित कर दिया गया तथा उनके निर्देशानुसार सुरक्षा प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं।’’

पातकालीन प्रतिक्रिया टीम स्थिति पर रख रही हैं नजर

अकासा एयर के प्रवक्ता ने बताया कि रविवार को उनकी कुछ उड़ानों को सुरक्षा चेतावनी प्राप्त हुईं। उन्होंने बताया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम स्थिति पर नजर रख रही हैं तथा सुरक्षा और नियामक अधिकारियों के संपर्क में हैं। सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया की कम से कम छह उड़ानों को धमकी मिली है लेकिन विमानन कंपनी की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं सामने आई है।

इस सप्ताह अब तक 90 से अधिक उड़ानों को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं जो सभी झूठी साबित हुई हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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