Braganza Ghat route: भारतीय रेलवे ने देश के सबसे खूबसूरत और रोमांचक रेल रूट्स में शामिल ब्रागांजा घाट की झलक दिखाकर यात्रियों का ध्यान खींचा है। साथ ही इस रूट पर चलती ट्रेन के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। कर्नाटक-गोवा सीमा पर मौजूद यह रेलमार्ग अपनी खड़ी चढ़ाई, घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और बादलों के बीच से गुजरती ट्रेनों के लिए जाना जाता है। रेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर इस रूट का फोटो साझा करते हुए लिखा था कि ब्रागांजा घाट की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के बीच से गुजरती ट्रेन का नजारा ऐसा अनुभव है, जिसे मिस नहीं करना चाहिए।
खैर रेलवे का यह पोस्ट पुराना है, लेकिन इस रूट के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते रहेत हैं। ब्रागांजा घाट पश्चिमी घाट क्षेत्र में पड़ता है और इसे भारतीय रेलवे के सबसे चुनौतीपूर्ण रेल सेक्शनों में गिना जाता है। यहां कई जगहों पर तीखी चढ़ाई और खतरनाक मोड़ हैं, जहां ट्रेन बेहद सावधानी से गुजरती है। यही वजह है कि यह रूट इंजीनियरिंग के लिहाज से भी खास माना जाता है।
हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक करते हैं दीदार
इस रूट की सबसे बड़ी पहचान इसकी प्राकृतिक खूबसूरती है। मानसून के दौरान यहां का नजारा और भी शानदार हो जाता है। चारों तरफ फैली हरियाली, पहाड़ों से गिरते झरने और बादलों के बीच से निकलती ट्रेन यात्रियों को यादगार अनुभव देती है। इसी रूट पर मशहूर दूधसागर जलप्रपात भी पड़ता है, जिसे देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
रेलवे और ट्रैवल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ब्रागांजा घाट पर ट्रेन यात्रा सिर्फ सफर नहीं बल्कि एक विजुअल एक्सपीरियंस बन जाती है। कई यात्री खासतौर पर खिड़की वाली सीट बुक करते हैं ताकि घाट सेक्शन के खूबसूरत दृश्य करीब से देख सकें। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे भारत के सबसे खूबसूरत रेल रूट्स में से एक बताया। कुछ लोगों ने इसे 'भारत का मिनी स्विट्जरलैंड रेल सफर' तक कह दिया।
पिछले साल खबर आई थी कि भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे सेक्शन में से एक में सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) पश्चिमी घाट के भीतर कर्नाटक-गोवा सीमा पर स्थित ब्रागांजा घाट के कैसल रॉक-कुलेम खंड में एक एडवांस टनल रेडियो संचार प्रणाली लागू करने जा रहा है।
26 किलोमीटर का ये रूट
26 किलोमीटर का यह हिस्सा पश्चिमी घाट से होकर गुजरता है, जो एक UNESCO विश्व धरोहर स्थल है। यह अपनी 1-में-37 की खड़ी ढलान, घने जंगलों और मॉनसून से बनने वाले मशहूर दूधसागर झरने के लिए जाना जाता है। इस लाइन पर करंजोल, दूधसागर और सोनालियम जैसे दूरदराज के स्टेशन भी हैं और यह पर्यटकों के साथ-साथ रेलवे कर्मचारियों की भी सेवा करती है। हालांकि, SWR अधिकारियों ने बताया था कि सड़क मार्ग की कमी और इस रास्ते पर बनी 16 सुरंगों के अंदर लगातार होने वाले 'रेडियो ब्लैक-आउट' की वजह से लंबे समय से सुरक्षा और संचार से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
